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133 जेलों में समाए 45 हजार से ज्यादा बंदी

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फोटो-- केन्द्रीय जेल 

 जेल में 21 से 30 वर्ष के पुरुषों, 30 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा 


मध्यप्रदेश की केन्द्रीय, जिला, खुली और उपजेलों में क्षमता से 47 प्रतिशत ज्यादा आरोपी 


भोपाल। मध्यप्रदेश में कुल 133 जेलें हैं। इनमें 11 केन्द्रीय, 41 जिला, 08 खुली और 73 उप जेलें हैं। इन जलों में क्षमता से लगभग डेढ़ गुना बंदी रह रहे हैं। अब जेल विभाग बढ़े हुए बंदियों के व्यवस्थापन के लिए जेलों में 44 अतिरिक्त बैरिकों का निर्माण करा रहा है। जबकि छिंदवाड़ा और इंदौर में नई जेलों का निर्माण कार्य जारी है।  वहीं उज्जैन में खुली जेल तथा भिण्ड और बुरहानपुर में भी नई जेलों के निर्माण की पुनरीक्षित स्वीकृति शासन से हो गई हैं। 

मध्यप्रदेश की 11 केन्द्रीय जेलों की कुल बंदी क्षमता 14306 पुरुषों एवं 790 महिलाओं की है, जबकि 31 दिसम्बर 2024 की स्थिति में जेल में 23650 पुरुष एवं 1251 महिला मिलाकर कुल 24901 बंदी थे। इसी प्रकार प्रदेश की 41 जिला जेलों की कुल क्षमता 9251 पुरुषों और 758 महिलाओं की है,लेकिन इमें 13 हजार पुरुष और 666 महिला मिलाकर कुल 13666 बंदी थे। प्रदेश की 8 खुली जेलें सिर्फ पुरुषों के लिए हैं, जिनमें 138 की क्षमता के विपरीत 130 बंदी और 73 उप जेलों की क्षमता 4962 पुरुष और 439 महिला की है, जिनमें 6394 पुरुष एवं एक महिला बंदी थी। इस तरह कुल 30644 क्षमता वाले 133 बंदीगृहों में 45092 बंदी हैं। 


तीन सालों में 17 प्रतिशत घटी बंदी संख्या 

मप्र की जेलों में विगत तीन सालों में बंदियों की संख्या 17.27 प्रतिशत घटी है। 31 दिसम्बर 2022 की स्थिति में कुल 48857 बंदी थे। 31 दिसम्बर 2023 तक यह 11.97 प्रतिशत घटकर यह संख्या 45543 रह गई, लेकिन अगले एक साल में फिर से 5.3 प्रतिशत घटकर 31 दिसम्बर 2024 तक यह संख्या 45092 रह गई। 


आंदोलनों से बढ़े बंदी बिगाड़ते हैं बजट 

जेल विभाग का कहना है कि जेलों के अंदर पहुंचने वाले बंदियों की संख्या निश्चित नहीं होती। आंदोलन आदि कारणों से जेलों में बंदियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि से खर्च बढ़ जाता है। बंदियों को भोजन, वस्त्र, चिकित्सा एवं अन्य खर्च एवं बंदियों को दी जाने वाली सुविधाएं जिनका आधार कोई निश्चित धनराशि नहीं है, लेकिन इसका स्केल निर्धारित है। नियमों के अधीन बंदियों के लिए खाद्यान्न सामग्री एवं अन्य वस्तुओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं की जा सकती। 


3 सालों में घटती-बढ़ती रही है संख्या (महिला+पुरुष)

बंदी श्रेणी 2022 (म+पु-योग) 2023 (म+पु-योग) 2024 (म+पु-योग) 

दंडित बंदी 20844+917=20844 21435+948=22383 20822+938 =21760

विचाराधीन बंदी 25884+993=26877 22110+854=22964 22155+977 =23132

अन्य बंदी       218+01=219        195+01=196         197+03=200

कुल योग 46946+1911= 48857 43740+1803=45543 43174+1918=45092


21 से 30 साल की आयु में सबसे ज्यादा अपराध 

18 साल से 80 वर्ष और इससे भी अधिक उम्र के बंदी जेलों में सजा काट रहे हैं। जेलों में बंदियों के आंकड़े बताते हैं कि 21 से 30 वर्ष की युवा आयु में सर्वाधिक अपराध होते हैं। वर्ष 2022 से 2024 के बीच तीन सालों में आयु वर्ग के हिसाब से बंदियों का यह आंकड़ा इस प्रकार रहा। 

- 18 से 21 (कुल 3 वर्ष) आयु वर्ग के बंदी वर्ष 2022 में 4602 पुरुष एवं 42 महिला वर्ष 2023 में 4652 पुरुष एवं 79 महिला तथा वर्ष 2024 में 4382 पुरुष एवं 61 महिला बंदी थीं। 

- 21 से 30 (कुल 10 वर्ष) आयु वर्ग के बंदी वर्ष 2022 में 18344 पुरुष एवं 467 महिला वर्ष 2023 में 15792 पुरुष एवं 461 महिला तथा वर्ष 2024 में 16692 पुरुष एवं 457 महिला बंदी थीं। 

- 30 से 50 (कुल 20 वर्ष) आयु वर्ग के बंदी वर्ष 2022 में 18980 पुरुष एवं 1011 महिला वर्ष 2023 में 18266 पुरुष एवं 948 महिला तथा वर्ष 2024 में 17712 पुरुष एवं 1021 महिला बंदी थीं।  

- 50 वर्ष अधिक आयु वर्ग के बंदी वर्ष 2022 में 5020 पुरुष एवं 391 महिला वर्ष 2023 में 5030 पुरुष एवं 315 महिला तथा वर्ष 2024 में 4388 पुरुष एवं 379 महिला बंदी थीं।  




‘जेलों में बंदियों की बढ़ी संख्या के समायोजन के लिए जेलों में 127 नए बैरक का निर्माण चल रहा है। कुछ नई जेलें निर्माणाधीन हैं, कुछ प्रस्तावित हैं। संभवन: है कि अगले 2-3 साल में जेलों में इस तरह की समस्या नहीं रहेगी।’ 

जीपी सिंह, महानिदेशक, जेल, मप्र