मध्यप्रदेश

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उच्च न्यायालय ने यथावत रखी दरिंदे को तिहरे मृत्युदंड की सजा, कम नहीं हुई मासूम से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले की सजा

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भोपाल। राजधानी भोपाल में मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म और बाद में हत्या करने वाले दरिंदे अतुल निहाले की सजा उच्च न्यायालय से कम नहीं हो सकी है। भोपाल सत्र न्यायालय से मिली तिहरे मृत्युदंड की सजा के विरुद्ध दोषी युवक के परिजनों ने उच्च न्यायालय में अपील की थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने भी सजा को यथावत रखा है। 

उल्लेखनीय है कि विगत 24 सितम्बर 2024 को राजधानी भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र में एक 5 वर्षीय बच्ची अपने चाचा के फ्लैट से खेलते समय गायब हो गई थी। दो दिन बाद उसका शव 30 वर्षीय आरोपी अतुल निहाले के घर पानी की टंकी में मिला था। भोपाल सत्र न्यायालय ने  इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इस जघन्य अपराध को ‘विरलतम से विरलतम’ (रेयर ऑफ रेयरेस्ट) श्रेणी का मामला माना था। साथ ही टिप्पणी की थी कि अगर मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह आरोपी को दी जानी चाहिए थी। मृत्युदंड की सजा के विरुद्ध दोषी युवक के परिजनों द्वारा की गई अपील को मप्र उच्च न्यायालय की जबलपुर मुख्यपीठ ने शुक्रवार को यथावत रखा है। भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत तिहरे मृत्युदंड का मप्र में यह पहला मामला है। 

तीनों अपराधों में मृत्युदंड 

आरोपी अतुल निहाले को भोपाल सत्र न्यायालय ने तीन अलग-अलग अपराधों मासूम के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई, जिसे तिहरा हत्याकांड कहा गया। अतुल को विभिन्न धाराओं के तहत दोहरे आजीवन कारावास की सजा भी मिली है। दोषी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल को साक्ष्य छिपाने के आरोप में दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।