अपराध

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सेंट्रल बैंक के रिटायर्ड मैनेजर के साथ सायबर ठगी, आठ दिन में गंवाए 57 लाख, 50 हजार रुपए

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भोपाल। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त प्रबंधक के साथ 57 लाख, 50 हजार रुपए की साइबर ठगी हो गई। इस मामले की शिकायत स्टेट सायबर क्राइम में पहुंची थी। जहां से चार दिन बाद उसे मिसरोद थाने की पुलिस को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया। जालसाजी शेयर मार्केट में निवेश करने पर मुनाफा दिलाने के लालच देकर किया गया।

मिसरोद थाना पुलिस के अनुसार 61 वर्षीय पंकज श्रीवास्तव पिता स्व. एमडी श्रीवास्तव सलैया स्थित शिवांगन कॉलोनी में रहते हैं। वे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि दिसंबर के पहले सप्ताह में वे एक्सिस बैंक की पार्टनर फर्म एक्सिस डायरेक्ट को गूगल  पर सर्च कर रहे थे। यह फर्म म्युचल फंड में निवेश कराने का काम करती है। एक सप्ताह बाद उनके पास कॉल आया। जालसाज ने एक्सिस सिक्योरिटीज नाम बताकर उनका ऑन लाइन खाता खुलवाया। मिलता-जुलता नाम देखकर पंकज श्रीवास्तव को यकीन हो गया कि फर्म असली है। उन्हें निवेश के लिए बोला तो पहले 12 दिसंबर को 50 हजार रुपए निवेश किए। जिसमें उन्हें छह हजार रुपए का मुनाफा जालसाजों के बनाए गए नकली साफ्टवेयर में दिखाया गया। इसके बाद जालसाजों ने तुरंत रिफंड और फायदे का लालच देकर 17 दिसंबर को कई किस्त में 57 लाख रुपए का निवेश करा दिया। आरोपियों ने रकम डलवाई तो उन्हें कई गुना फायदा होता दिखाया गया। जब उनके पास जमा पूरी रकम खत्म हो गई तो जालसाजों ने फर्म की गाइड लाइन बोलकर 43 लाख 87 हजार रुपए जमा करने पर ही लाभांश निकालने की शर्त रख दी। ऐसा नहीं करने पर पूर्व में जमा रकम शून्य होने की चेतावनी दी गई। इस कारण उन्हें यकीन हो गया कि वे जालसाजी के शिकार बन गए हैं। उन्होंने पहले थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सायबर क्राइम की हेल्प लाइन में भी मदद मांगी। जब कोई समाधान नहीं हुआ तो वे राज्य सायबर क्राइम मुख्यालय में पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार को जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया है। प्राथमिक जांच में सात मोबाइल नंबर और आधा दर्जन बैंक खातों को चिन्हित कर लिया गया है। जिनसे हुए लेन-देन को फ्रीज कराने का काम किया जा रहा है। 

सिर्फ 18 फीसदी फ्रीज करा सकेंगी एजेंसियां

राजधानी में एक पखवाड़े के भीतर शेयर मार्केट में निवेश की आड़ में सायबर धोखाधड़ी का यह तीसरा मामला है। इससे पहले क्राइम ब्रांच और बिलखिरिया थाने में यह मुकदमे दर्ज हुए है। तीनों मामलों में अपराध करने का तरीका एक जैसा ही है। जिसमें बदमाशों ने करीब 86 लाख, 21 हजार 882 रुपए की रकम तीन पीडि़तों से ऐंठ ली। इसमें दो वृद्ध हैं। बिलखिरिया में अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के शिक्षक दीपक कुमार के साथ सायबर फ्रॉड हुआ था। इससे पहले पहले क्राइम ब्रांच में मोहम्मद आरिफ ने एफआईआर दर्ज कराई थी। यह सारी घटनाएं सितंबर से दिसंबर, 2025 के बीच हुई थी। पुलिस सायबर फ्रॉड के जरिए अलग एक दर्जन से अधिक खातों में ट्रांसफर हुई 18 फीसदी की रकम ही फ्रीज करा सकी है। जबकि 70 लाख रुपए से ज्यादा की रकम जालसाजों ने एटीएम के जरिए निकाल ली।