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मध्यप्रदेश

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मप्र की चार विभूतियों को पद्मश्री, कैलाशचंद पंत, मोहन नागर, भगवानदास रैकवार, नारायण व्यास को मिला सम्मान

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भोपाल। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। देश में इस साल 5 हस्तियों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। इनमें मध्य प्रदेश की चार विभूतियां शामिल हैं। भोपाल के साहित्यकार एवं लेखक कैलाश चंद्र पंत, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार और नारायण व्यास को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा।

भगवानदास रैकवार को खेल के क्षेत्र में , कैलाश चंद्र पंत को साहित्य एवं शिक्षा, मोहन नागर को समाज सेवा और नारायण व्यास को पुरातत्व क्षेत्र से इस समान के लिए चुना गया है। राजगढ़ के सारंगपुर के रहने वाले मोहन नागर को पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए काम के लिए यह सम्मान मिला है। नागर पिछले तीन दशक से बैतूल स्थित भारत भारती शिक्षा संस्थान से जुड़े हैं। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद में उपाध्यक्ष हैं। 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार को अखाड़ा संस्कृति की प्राचीनतम युद्ध शैली के लिए पद्मश्री पुरस्कार मिला है। 

पद्मश्री मेरी नहीं हिन्दी भवन की उपलब्धि: पंत 

भोपाल। वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान के लिए चुने गए भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद पंत ने चर्चा में उन्हें मिले इस राष्ट्रीय सम्मान का श्रेय हिन्दी भवन को समर्पित कर दिया। 

श्री पंत ने बताया कि साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनकी यात्रा इंदौर से शुरू हुई और भोपाल में समापन की ओर अनवरत जारी है। उन्होंने कहा कि भोपाल सहित प्रदेशवासियों के सहयोग और प्रोत्साहन से ही वे इस सम्मान के भागी बने हैं। 

अछूते विषयों पर राष्ट्रीय विमर्श जीवन का बड़ा मोड़ 

श्री पंत बताते हैं कि हिन्दी भवन के माध्यम से उन्होंने देश में ऐसे विषयों पर विमर्श कराया जो अछूते थे। भारतीय ज्ञान परंपरा, जिसकी बात आज बहुत ज्यादा हो रही है, इसकी शुरूआत सबसे पहले उन्होंने हिन्दी भवन में छोठी सी गोष्ठी के माध्यम से कराई। पावस व्याख्यान माला में भी यह विषय रखा गया। बाद में व्याख्यान माला की पुस्तक निकाली थी। हिन्दी भवन के माध्यम से प्रकाशित पुस्तकें आज देशभर में शोधों के संदर्भ के रूप में उपयोग की जा रही हें। यह बहुत ही महत्वपूर्ण काम हुआ। 

श्री पंत बताते हैं कि साहित्यकार निवास का निर्माण, जो देश में किसी भी हिन्दी संस्थान ने नहीं कराया। हिन्दी भवन के माध्यम से पुस्तकालय संचालित कर रहे हैं। बच्चों के लिए यहां अलग से केन्द्र है। हिन्दी भवन के वर्तमान अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव (राज्य निर्वाचन आयुक्त) द्वारा शुरू किए गए कोचिंग केन्द्र का उल्लेख करते हुए वे कहते हैं कि यहां आईएएस और पीसीएस के विद्यार्थी तैयार किए जा रहे हैं, यह भी संस्थान की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जो भी उपलब्धियां हैं, वह न्दिी भवन की हैं, मैं तो सहयोगी बनकर चलता रहा हँ।