Breaking News:

• रेखा यादव ने संभाला महिला आयोग अध्यक्ष का कार्यभार • ‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में कलेक्टर के निर्देश • पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष ने मिठाई के साथ खिलाई झालमुड़ी • कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार • मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व दिन • रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की चक्रानुक्रम (रोटेशन) सूची! अभी मैदानी अमले को मिलना शुरू हुई नई पदस्थापना
मध्यप्रदेश

Image Alt Text

सरकारी ऋण योजनाओं में करोड़ों का घोटाला, ईडी ने दर्ज की शिकायत, बैंक प्रबंधक सहित अन्य आरोपियों को नोटिस जारी

मध्यप्रदेश

भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय ने मनोज परमार एवं अन्य के मामले में मार्क पियस करारी और 4 अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), भोपाल के समक्ष एक अभियोजन शिकायत (पीई) दायर की है। न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।

ईडी ने इस मामले में जांच सीबीआई, भोपाल द्वारा पूर्व में मनोज परमार, पंजाब नेशनल बैंक, आष्टा, जिला सीहोर के तत्कालीन शाखा प्रबंधक मार्क पियस करारी एवं अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार शुरू की। सीबीआई ने मनोज परमार और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

ईडी की जांच में पता चला कि मनोज परमार ने पंजाब नेशनल बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की मदद से दो सरकारी योजनाओं - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (सीएमवाययूवाय) के तहत धोखाधड़ी से लोन लिए। 2016 में फर्जी आवेदकों, जाली दस्तावेजों और मनगढ़ंत कोटेशन का उपयोग कर कुल 6.20 करोड़ रुपये के 18 लोन स्वीकृत किए गए, जिनमें से 6.01 करोड़ रुपये वास्तव में वितरित किए गए।

प्रबधक ने नियमों के विपरीत स्वीकृत किए ऋण

ईडी की जांच में पता चला कि प्रबंधक ने बैंक के लोन स्वीकृति नियमों की अनदेखी की गई, दूसरे स्तर की स्वीकृतियों को दरकिनार किया और शाखा प्रबंधक की वित्तीय शक्तियों से परे भी लोन स्वीकृत किए गए। बैंक अधिकारियों ने बाद में किए गए फील्ड निरीक्षणों से पुष्टि हुई कि कोई भी व्यावसायिक इकाई कभी स्थापित ही नहीं की गई और कई कथित ऋण धारकों ने भी ऋण के लिए आवेदन करने या ऋण लिए जाने से इंकार कर दिया। इससे पता चला कि स्वरोजगार के लिए बनाई गई योजनाओं का घोर दुरुपयोग किया गया।

परिजनों के खातों में अंतरित हुई राशि 

जांच में पता चला कि ऋण घोटाले की राशि मनोज परमार और उसके करीबी सहयोगियों द्वारा संचालित फर्मों के खातों में अंतरित किया गया। इन खातों से, धन को उनके स्रोत को छिपाने के लिए कई संबंधित संस्थाओं के बीच ट्रांसफर किया गया, नकद में निकाला गया, और आंशिक रूप से मनोज परमार और अन्य के नाम पर संपत्तियां खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। मनोज परमार और अन्य द्वारा नियंत्रित फर्मों का उपयोग पैसे को घुमाने और झूठी व्यावसायिक गतिविधि दिखाने के लिए किया गया। सरकारी सब्सिडी वाले लोन फंड की यह सिस्टमैटिक रूटिंग, लेयरिंग और कैश विड्रॉल साफ तौर पर सरकारी पैसे का जानबूझकर गलत इस्तेमाल दिखाता है। ईडी ने पहले इस मामले में मनोज परमार और अन्य लोगों से संबंधित, आष्टा, सीहोर में स्थित लगभग 2.08 करोड़ रुपये की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था।