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तहसीलदार और सोसायटी चेयरमैन पर ईओडब्ल्यू ने की एफआईआर, शासकीय भूमि को में निजी नाम से दर्ज कराया, फिर स्कूल की भूमि पर ताना अस्पताल
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भोपाल/जबलपुर। नगर निगम जबलपुर द्वारा शैक्षणिक कार्य (विद्यालय) के लिए लीज पर दी गई 3.5 करोड़ रुपये कीमत की भूमि को फर्जीवाड़ा कर निजी नाम पर दर्ज कराने और शैक्षणिक कार्य के उद्देश्य से मिली लीज की भूमि पर अस्पताल बनाने वाले स्थानीय जॉय एज्यूकेशन सोसायटी के चेयरमैन अखिलेश मेबन और शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज करने वाले तहसीलदार के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने एफआईआर दर्ज की है।
ईओडब्ल्यू में इस गड़बड़ी की शिकायत जबलपुर निवासी राजकुमार ने की थी। शिकायत में बताया गया था कि जॉय एज्यूकेशन सोसायटी द्वारा नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर शासन, नगर निगम जबलपुर को हानि पहुंचाई जा रही है। शिकायत की जांच में पता चला कि मप्र शासन के आदेश के पालन में जॉय एज्यूकेशन सोसायटी को, जिसके चेयरमैन अखिलेश मेबन निवासी जबलपुर है, उन्हें शासन की रियायती दरों पर 7500 वर्गफुट भूमि नगर निगम जबलपुर की सीमा में शैक्षणिक कार्य के लिए 30 वर्षों के लिए दी गई है।
स्कूल की भूमि पर बना दिया अस्पताल
लीज डीट में स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि भूमि शैक्षणिक उपयोग के लिए दी जा रही है। अन्य गतिविधियों के उपयोग हेतु नगर निगम जबलपुर की अनापत्ति आवश्यक होगी। यह लीज वर्ष 2020 में समाप्त हो गई। लेकिन सोसायटी चेयरमैन के आवेदन पर 22 अप्रैल 2022 को लीज फिर से शैक्षणिक उद्देश्य के लिए 30 वर्ष के लिए बढ़ा दी गई। लेकिन अखिलेश मेबन ने नगर निगम की अनुमति के बिना इस भूमि पर अस्पताल का निर्माण शुरू कर दिया।
तहसीलदार ने चेयरमैन को बना दिया भूमि मालिक
अस्पताल निर्माण कार्य शुरू होते ही सोसायटी चेयरमैन अखिलेश मेबन ने तत्कालीन तहसीलदार हरिसिंह धुर्वे के साथ अपराधिक षड्यंत्र रचकर नगर निगम जबलपुर को धोखे में रखकर शैक्षणिक कार्य के लिए लीज पर दी गई भूमि का मालिकाना हक बिना किसी वैधानिक दस्तावेज के अखिलेश मेबन को दे दिया। जबलपुर शहर के महत्वपूर्ण व्यवसायिक क्षेत्र में स्थित यह भूमि कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार लगभग 3.50 करोड़ रुपये की है। अखिलेश मेबन ने इस भूमि पर स्कूल संचालित नहीं किया और भवन के मूल स्वीकृत नक्शे के विपरीत अस्पताल बनाया।
इन धाराओं दर्ज हुई एफआईआर
ईओडब्ल्यू ने आरोपी अखिलेश मेबन, पूर्व चेयरमैन जॉय एज्यूकेशन सोसायटी, जबलपुर और हरिसिंह धुर्वे, तत्कालीन तहसीलदार के विरुद्ध भादंवि की धारा 318 (4) संपत्ति में धोखाधड़ी, धारा 316 (5) शासकीय सेवक द्वारा आपराधिक विश्वास घात, 61 (2) आपराधिक साजिश एवं 7 सी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है।
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