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खेतों में छोड़ा जा रहा कॉलेज का दूषित पानी, एनजीटी में दायर हुई याचिका, सुनावाई 12 मार्च को

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भोपाल। राजधानी भोपाल के एक निजी कॉलेज द्वारा हर दिन गैर उपचारित दूषित पानी आसपास के खेतों में छोड़ा जा रहा है। दूषित पानी के प्रभाव से क्षेत्र में दुर्गंध एवं गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। वहीं दूषित जल से खेतों में पैदा खाद्यान्न और सब्जियों का प्रभाव इसे उपयोग करने वाली क्षेत्र की 20 प्रतिशत जनसंख्या पर पड़ रहा है।  

नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) की प्रधान पीठ नई दिल्ली ने भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में खेतों में सीवेज जल छोड़े जाने से संबंधित मामले को स्वत: संज्ञान में लिया है। सुनवाई के लिए भोपाल बैंच में प्रकरण प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने यह मामला रामलाल मीणा द्वारा भेजी गई पत्र याचिका के आधार पर दर्ज किया। जिसमें आरोप लगाया गया कि मानसरोवर डेंटल एवं आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज कोलार रोड से प्रतिदिन भारी मात्रा में बिना उपचारित सीवेज जल खुले खेतों में छोड़ा जा रहा है। लगभग 130 एकड़ भूमि इस दूषित जल से सिंचित हो रही है। इस भूमि पर उत्पन्न खाद्यान्न व सब्जियां कोलार क्षेत्र की लगभग 20 प्रतिशत जनसंख्या द्वारा उपभोग की जा रही हैं। जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो रहा है।

शिकायत में में बताया गया है कि दूषित जल से भूजल स्रोतों के प्रदूषण, दुर्गंध फैलने और कैंसर, पेट संबंधी रोग, हेपेटाइटिस समेत अन्य संक्रामक बीमारियों  में वृद्धि हो रही है। ट्रिब्यूनल ने मामले को संज्ञान में लिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान आवेदक उपस्थित नहीं हुआ। फिर भी न्यायहित में आवेदन को खारिज न करते हुए उसे स्थगन प्रदान किया है। ट्रिब्यूनल ने यह मामला एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ भोपाल के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 12 मार्च को इस मामले में सुनवाई होगी।