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राजधानी

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महाशिवरात्रि पर 500 किन्नरों की हुई घर वापसी, विवादों में नये पदाधिकारियों की पदस्थापना

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भोपाल। महाशिवरात्रि पर 500 से अधिक किन्नरों ने घर वापसी करते हुए सनातन धर्म अपनाकर जीवन की नई शुरुआत की है। किन्नर अखाड़ा द्वारा लालघाटी में किन्नर ऋषि अजय दास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के किन्नर जुड़े थे। इस दौरान शंकराचार्य जैसे नये पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. प्रो. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इसे सनातन परंपरा और अनुशासन के विपरीत बताते हुए विरोध किया है।

      इसके पहले पहले आयोजित कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे किन्नरों ने विधि-विधान से सनातन धर्म स्वीकार किया। आयोजक ऋषिदास ने बताया कि कुल मिलाकर लगभग 500 किन्नरों ने  ‘घर वापसी’ की है। यह  आने वाले समय में और भी लोगों को इस पहल से जोड़ेंगे। उनका कहना था कि 

धर्म परिवर्तन, टेरर फंडिंग जैसी घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता थी। अब जब किन्नर समाज बड़ी संख्या में धर्म अपनाकर लौट रहा है, यह बदलाव शुभ संकेत है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर घर वापसी को किन्नर समाज के लिए एक नई आध्यात्मिक और सामाजिक यात्रा की शुरुआत बताते हुए कहा कि धर्म सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व का आधार है और किन्नर समाज इस बदलाव को नई उम्मीद के रूप में देख रहा है।

किसी को शंकराचार्य तो किसी को बनाया जगदगुरु

राजधानी के लाल घाटी क्षेत्र में हुए इस समारोह में शंकराचार्य नियुक्ति, महामंडलेश्वर चयन और किन्नर समाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। जिसमें अर्धनारीश्वर स्वरूप के भाव के साथ हिमांशु सखी को पुष्कर पीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। इसके साथ-साथ हेमांगी सखी को महामंडलेश्वर और किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में शंकराचार्य पद प्रदान किया गया। काजल ठाकुर और संजना को जगतगुरु का पद दिया गया। रानी ठाकुर को महामंडलेश्वर बनाया गया।  यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में किन्नर समाज के लोगों को धार्मिक पद प्रदान किए गए। इसके बाद किन्नर समाज में ही नहीं श्री हिन्दू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच जैसे संगठनों ने इसे अवैध व सनातन व्यवस्था की मान्य परंपराओं के विपरीत बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। 

शंकराचार्य की मर्यादा अखंड, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

ऋषि अजय दास द्वारा पदाधिकारियों की घोषणा को विरोध करते हुए किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. प्रो. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि शंकराचार्य की मर्याददा अखंड है और इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं है। वह राजधानी के जहांगिराबाद स्थित लाल शादी हाऊस में आयोजित पट् अभिषेक कार्यक्रम में शामिल हुईं थी और पत्रकारों से चर्चा कर रही थी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद परंपरा और अनुशासन का प्रतीक है। शंकराचार्य भगवान द्वारा स्थापित चारों पीठों की व्यवस्था अत्यंत विशिष्ट और अनुशासित है। पद की गरिमा होती है, शंकराचार्य का पद केवल उसी संन्यासी को प्राप्त हो सकता है, जो निदंडी संन्यास परंपरा में विधिवत दीक्षित हो और वेद-वेदांत में पूर्णत: पारंगत हो। अखाड़ा वर्तमान चारों शंकराचार्यों की आध्यात्मिक अधिसत्ता को पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार करता है। यही सनातन धर्म की स्थापित और शास्त्रसम्मत व्यवस्था है, जिसका संरक्षण हर सनातनी का कर्तव्य है। इस दौरान उन्होंने ऋषि अजय दास पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही काजल ठाकुर गुट और ऋषि अजयदास द्वारा आयोजित धर्म सम्मेलन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। 

शंकराचार्य बनाकर सनातन को पहुंचाया आधात

श्री हिंदु उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने किन्नर अखाड़े के शंकराचार्य बनाए जाने का विरोध जताया है। अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हमारे चार मठों में ही शंकराचार्य सिर्फ हो सकते हैं। वह हिंदू समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। किन्नर की कोई जात नहीं होती ना वह हिंदू होता है ना मुसलमान होता है। अगर इस प्रकार से कोई भी शंकराचार्य बनने लगेगा तो हर कोई अगर शंकराचार्य बनने लगेगा तो इससे सनातनी परंपरा को आघात पहुंचेगा और इसे किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।