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मध्यप्रदेश

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प्रमुख मंदिर जो सरकारी सूची में नहीं, उनका भी जीर्णोद्धार करेगी सरकार

मध्यप्रदेश

भोपाल। प्रदेश के ऐसे मंदिर जो शासकीय सूची में शामिल नहीं हैं, किंतु जिनका धार्मिक और पुरातात्विक महत्व है, उन्हें चिन्हित कर उनके विकास और जीर्णोद्धार की ठोस कार्ययोजना बनाएं। मप्र के संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने इस तरह के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। 

सोमवार को मंत्रालय में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री लोधी ने कहा कि आध्यात्मिक धरोहर का संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

तीन महीने में देवस्थानों का ऑनलाइन दस्तावेजीकरण

राज्य मंत्री लोधी ने प्रदेश के 55 जिलों के 22,098 शासन संधारित देवस्थानों की जानकारी की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी तीन माह के भीतर इन सभी देवस्थानों के दस्तावेजों का ऑनलाइन डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, मंदिरों के जीर्णोद्धार हेतु प्राप्त प्रस्तावों पर त्वरित कार्यवाही के लिए जिलों में समन्वय हेतु तत्काल नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए।

30 मार्च तक तीर्थदर्शन की 12 नई ट्रेनें

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि 10 फरवरी 2026 तक 19 ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा कराई जा चुकी है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने शेष 12 ट्रेनों का संचालन 30 मार्च 2026 तक पूरी गुणवत्ता और योजनाबद्ध तरीके से करने के निर्देश दिए।

राज्य के बाहर की संपत्तियों का होगा सदुपयोग

राज्य मंत्री श्री लोधी ने निर्देशित किया कि प्रदेश के बाहर स्थित विभागीय परिसंपत्तियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जाए। इन संपत्तियों के बेहतर उपयोग और उनके विकास के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार किया जाए, ताकि राज्य की संपत्तियों का संरक्षण हो सके। उन्होंने मप्र तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्राधिकरण के अंतर्गत अब तक 111 तीर्थ और 1629 मेले पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंत्री लोधी ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जानी और विभाग में रिक्त पदों को शासन के नियमानुसार शीघ्र भरने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।