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राजधानी

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राजधानी सहित पूरे प्रदेश में अभी भी दौड़ रहे कई अनफिट वाहन

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दुर्घटनाओं और मौतों के बाद ही अधिकारियों को क्यों याद आते हैं फिटनेस और परमिट  

भोपाल। मध्यप्रदेश में जब भी अनफिट या अवैध रूप से संचालित वाहन से कोई बड़ी सडक़ दुर्घटना होती है। परिवहन विभाग के दोषी अधिकारियों के निलंबन अथवा मूल विभाग में वापसी जैसी कार्रवाई के साथ कुछ दिन के लिए वाहनों की सख्ती से जांच शुरू हो जाती है। मामला ठंडा पड़ते ही निलंबितों की बहाली हो जाती है और एक बार फिर से सडक़ों पर अवैध और अनफिट वाहन दौडऩे लगते हैं। विभागीय जांच दल और अधिकारी कार्यालयों में जाकर बैठ जाते हैं और फिर से सडक़ पर उतरने के लिए एक और भीषण सडक़ दुर्घटना होने तक का इंतजार करने लगते हैं! 

सोमवार को राजधानी भोपाल के बाणगंगा क्षेत्र की घाटी पर अवैध रूप से संचालित अनफिट बस के ब्रेक फेल होने से हुई भीषण दुर्घटना के बाद शासन, प्रशासन और परिवहन विभाग के अधिकारी एक बार फिर से सक्रिय नजर आने लगे हैं। संभागीय आयुक्त ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को दोषी मानते हुए सोमवार की रात में ही निलंबित कर दिया। वहीं अब राजधानी सहित प्रदेशभर में एक बार फिर से अनफिट और अवैधानिक रूप से संचालित यात्री व स्कूल वाहनों की जांच शुरू हो गई है। खास बात यह है कि प्रदेशभर में अनफिट और अवैध वाहनों पर कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद राजधानी की सडक़ों पर अनफिट व कंडम वाहन दौड़ते नजर आए। मप्र में आज भी छोटे शहरों और गांव देहातों और स्कूल-कॉलेजों में कई ऐसे यात्री और व्यवसायिक वाहन चल रहे हैं, जिनकी उम्र 25-30 वर्ष या अधिक है, पूरी तरह अनफिट हैं, लेकिन शहरों और राजमार्गों पर दौड़ लगा रहे हैं। 

मप्र में कई सरकारी वाहन भी अनफिट 

मप्र में 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए सरकार स्क्रैप पॉलिसी ला चुकी है। पुराने सभी वाहनों को स्क्रैप किए जाने की घोषणा भी हो चुकी है। लेकिन शासन और पुलिस सहित लगभग सभी विभागों में ऐसे सैकड़ों वाहन हैं जो अनफिट हैं, लेकिन सडक़ों पर दौड़ रहे हैं। 

अवैध वसूली में जुटे परिवहन उडऩदस्ते? 

मध्यप्रदेश की सीमाओं से सटे राजमार्गों पर चेकपोस्ट के स्थान पर चेकपॉइंट बन चुके हैं। जिलों और संभागीय मुख्यालयों में अवैध और अनफिट वाहनों पर कार्रवाई के लिए परिवहन उडऩदस्ते बनाए गए हैं। इन उडऩदस्तों को सिर्फ राजमार्गों पर ट्रकों, बसों को रोककर अवैध वसूली करते देखा जा सकता है। हाल में कई वीडियो भी वायरल हुए हैं। लेकिन मंत्री से लेकर अधिकारी तक मौन हैं। जिन उडऩदस्तों को अवैध रूप से संचालित अनफिट, अवैध और नियम विरुद्ध संचालित वाहनों पर कार्रवाई करना चाहिए, वे राजमार्गों पर ट्रकों से अवैध वसूली करते नजर आ रहे हैं। 

कौन करेगा एटीएस की फिटनेस की जांच? 

मप्र परिवहन विभाग के तीन संभागीय कार्यालयों ग्वालियर, भोपाल और इंदौर में वाहनों की फिटनेस का काम निजी कंपनी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) को दिया गया है। ट्रांसपोर्टल लगातार कंपनी की अनियमितताओं और घूसखोरी की शिकायत कर रहे हैं। कंपनी के कर्मचारियों पर आरोप है कि रिश्वत से अनफिट वाहनों को फिट और रिश्वत नहीं देने पर फिट वाहनों को भी अनफिट बताकर फेल किया जा रहा है। इस तरह की एक भी शिकायत को अब तक अधिकारियों ने संज्ञान में नहीं लिया है। 

विभागीय फिटनेस फीस और अर्थदण्ड

- वाहन के पंजीयन के 2 साल तक फिटनेस प्रमाण पत्र जरूर नहीं

- 2 से 8 साल तक दो साल में फिटनेस जरूरी, 500-800 रुपये फीस। 

- 2 से 8 साल तक फिटनेस में देरी पर 50 रुपये प्रतिवर्ष अर्थदण्ड। 

- 8 से 15 साल तक (ग्रीन टैक्स के साथ) लगभग एक हजार रुपये। 

- 15 साल पुराने वाहन पर फीस लगभग एक हजार रुपये, फिटनेस में देरी पर अर्थदण्ड 50 रुपये प्रतिदिन। 

भोपाल में एटीएस के फिटनेस का गणित 

- फिटनेस की ऑनलाइन अपॉइंटमेंट फीस 300 रुपये, फेल होने पर वाहन की कमी पूरी करने के बाद री-आपॉइंटमेंट फीस करीब 150 रुपये। 

- वाहन मालिक द्वारा अपॉइंटमेंट पर अनफिट वाहनों की संख्या ज्यादा। वहीं एजेंट (दलाल) के माध्यम से फीस कई गुना ज्यादा, लेकिन अनफिट वाहन भी हुए फिट।  

- एजेंट के माध्यम से 8 साल पुराने वाहन पर फिटनेस खर्च 3700 रुपये। 8-15 साल पुराने छोटे वाहन पर 1300 रुपये और हेवी वाहन पर 2300 रुपये अतिरिक्त। 

- 15 साल पुराने छोटे वाहनों को 8 से 8.5 हजार में और हेवी वाहनों को 15 हजार रुपये में फिटनेस। 

- पुराने वाहन का संधरण खर्च एवं अधिक फीस के साथ रिश्वत के कारण इन्हें अवैध रूप से चलाया जा रहा है।