अपराध
पीसीपीएनडीटी एक्ट उल्लंघन पर स्वास्थ्य विभाग की कड़ी कार्यवाही, 3 चिकित्सकों और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक पर दायर किया परिवाद
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भोपाल। गर्भधारण पूर्व और प्रसूति पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के उल्लंघन पर सीएमएचओ भोपाल एवं समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एक्ट द्वारा माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय में मंगलवार को परिवाद दायर किया गया। जिसमें तीन चिकित्सकों सहित डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं गर्भधारण पूर्व और प्रसूति पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 की धाराओं में आरोपी बनाया गया है।
समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एक्ट द्वारा दायर परिवाद में एयरपोर्ट रोड गांधीनगर स्थित न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक मोहम्मद दानिश अली पुत्र सरवर अली और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ईशांत जाटव पुत्र सुरेश कुमार जाटव को एवं एक अन्य प्रकरण में मार्वल अस्पताल के संचालक डॉ. विशाल श्रीवास्तव पुत्र ए के श्रीवास्तव, डॉ. कृति श्रीवास्तव पत्नी डॉ. विशाल श्रीवास्तव को धारा 223 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं गर्भधारण पूर्व और प्रसूति पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 की धारा 28 अपराध धारा 23 , पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 एवं नियम 1996 के नियम क्रमशः 9 (1,4) एवं 9 (1,4,8) में मामला दर्ज करवाया गया है।
पूर्व में इन चिकित्सकों की गतिविधियों को पीसीपीएनडीटी एक्ट के विपरीत एवं संदिग्ध मानते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल कार्यालय ने संस्थाओं की मान्यता निरस्त की गई थी। मंगलवार को सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर इन चिकित्सकों एवं डायग्नोस्टिक केंद्र संचालक के खिलाफ परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेश पर इन सभी के खिलाफ वैधानिक धाराओं के तहत केस चलेगा।
बता दें कि इस साल 22 जनवरी को सीएमएचओ कार्यालय की निरीक्षण टीम को मार्वल हॉस्पिटल में संचालित सोनोग्राफी सेंटर में अनियमितताएं मिली थीं। यहां पर फॉर्म एफ का विधिवत संधारण नहीं किया जा रहा था । साथ ही एएनसी रजिस्टर भी में भी प्रविष्ठियां ठीक ढंग से नहीं की गई थी। इन अनियमितताओं को देखते हुए दस्तावेज जप्त कर मशीन सील की गई थी।
न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर में रिक्त एफ फॉर्म में डॉ. ईशांत जाटव के सील साइन मिले थे। साथ ही एएनसी फॉर्म और एफ फॉर्म भी अधूरे भरे मिले थे। एक्ट के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन पाए जाने पर सीएमएचओ द्वारा डॉ. ईशांत जाटव को नोटिस जारी कर आगामी आदेश तक उनके द्वारा सोनोग्राफी करना प्रतिबंधित किया गया था। साथ ही केंद्र की पीसीपीएनडीटी मान्यता भी निरस्त की गई थी। न्यायालय ने तीनों चिकित्सकों एवं डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक को उक्त प्रकरण में जमानत दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवाद में दिए गए विवरण एवं तथ्यों के आधार पर जांच जारी रहेगी।
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