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मातृशक्ति ही राष्ट्रनिर्माण की धुरी, राम और शिवा तभी पैदा होंगे, जब माँ कौशल्या और जीजा बनेगी : स्वामी जितेन्द्रनाथ
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विश्वमांगल्य सभा का मध्यभारत प्रांत का अधिवेशन आयोजित
भोपाल। ‘व्यक्ति निर्माण’ घर से ही हो सकता है। माता-पिता दोनों ऐसे चाहिए जो संतान में महान व्यक्तित्व का निर्माण कर सकें। संतान में संस्कारों का सृजन करने में माँ की प्रमुख भूमिका होती है। संतान को राम बनाने के लिए कौशल्या और शिवाजी जैसा तैयार करने के लिए ‘माँ’ को जीजाबाई बनकर सामने आना होगा।
यह बात विश्वमांग्ल्य सभा, श्रीनाथ पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी जितेंद्रनाथ महाराज ने सभा द्वारा भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित मध्यभारत प्रांत के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कही।
स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज ने कहा कि पुरुषार्थ का विषय हो तो दुर्गा, शिक्षा के विषय में सरस्वती, भरण-पोषण में शाकम्भरी देवी, राक्षसों से लड़ते शंकर की सहयोगिनी काली, तपस्या के गायत्री, बलिदान तो सती ही याद आती हैं। यह माता स्त्री ही तो है। प्रत्येक पुरुषार्थ के पीछे महिला ही है। महिला वंश, कुटुम्ब, की धारा है। समाज, वंश, परिवार को दिशा, मार्गदर्शन, आग्रह की भूमिका में माँ ही रहती है। जहां विजय, चेतना, पुरुषार्थ हैं, वहां माँ ही है। माँ वंश के अंश की परिचायिका है। कार्यक्रम में विश्वमांग्ल्य सभा की राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्रीमती पूजा देशमुख, मध्यप्रदेश की अध्यक्ष श्रीमती सूरज डामोर, विधायक श्रीमती रीति पाठक, राष्ट्रीय जनसंपर्क प्रमुख एवं अखिल भारतीय संयोजिका अनुराधा यादव, मध्यभारत प्रांत की अध्यक्ष विभा रघुवंशी, कार्यक्रम की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती लतिका चौहान मंच पर उपस्थित रहीं।
संकल्प से ही होगा शक्ति का सृजन
जितेन्द्रनाथ महाराज ने कहा कि संकल्प से ही शक्ति का सृजन होता है। विश्व में बने युद्ध के हालातों के बीच भारत को समझना होगा।भारत का जितना विजय का इतिहास, उतना पराजय का इतिहास भी है। संतान को राष्ट्र के प्रति समर्पण की परिभाषा सिखाने का समय आया। बच्चों को पुरुषार्थ की गाथा सुनानी होगी। उनका खून खौलेगा, महापुरुषों के पौरुष की गाथा सुनानी होगी। आज बच्चों से संवाद पैदा करने की जरूरत है। विश्व निर्माण के चिंतन का भाव कहीं खो गया है। जिस घर, परिवार, वंश में हमें जन्मा, पाला, पोसा, उस व्यवस्था का चिंतन कहीं छूट गया है। संतानों को बताना होगा ‘देश, समाज, राष्ट्र, वंश, घर, सृष्टि हमें देती है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।’
गौरवपूर्ण पुरुष बनाने मातृमंदिर निर्माण करेगी सभा
स्वामी जितेन्द्रनाथ ने कहा कि विश्वमांगल्य सभा मातृमंदिर निर्माण करने जा रही है, जिसमें गौरवपूर्ण पुरुष का निर्माण करेंगे। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और मातृशक्ति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समाज में भगवान, देश और धर्म के त्रिवेणी संगम की बात की जाती है। इसमें भगवान अर्थात परमेश्वर/आध्यात्मिक शक्ति में आस्था, देश मतलब राष्ट्र के प्रति समर्पण और राष्टभक्ति तथा धर्म मतलब भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों का पालन।
भारतीय जीवनचर्या पर आधारित प्रदर्शनी का लोकार्पण
कार्यक्रम स्थल रविन्द्र भवन परिसर में विश्व मांगल्य सभा की ओर से भारतीय जीवनचर्या पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है। इसका लोकार्पण श्रीधाम पीठाधीश्वर स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज ने फीता खोलकर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और आयोजक महिला शक्ति से प्रदर्शनी के विषयों पर चर्चा भी की। प्रदर्शनी में भाषा,भूषा,भोजन, भजन भवन, भ्रमण के महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
युगानुकूल मातृत्व और मातृसंगठन की आवश्यकता पर हुए सत्र
अधिवेशन के पहले दिन शुक्रवार को उदघाटन सत्र के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई। इसके बाद प्रथम उद्बोधन सत्र में युगानुकूल मातृत्व एवं द्वितीय सत्र में मातृसंगठन की आवश्यकता एवं परिणामों पर संबोधन हुए। शाम को भव्य शोभायात्रा निकाली गई एवं रात्रि 8.30 बजे से एक घंटे का फाग उत्सव एवं भजन संध्या का आयोजन हुआ।
इन महिला प्रतिभाओं का सम्मान आज
विश्व मांग्ल्यसभा के प्रांत अधिवेशन के दूसरे दिन शनिवार को समाज के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिला शक्ति का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम में स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज के अलावा मुख्य अतिथि के रूप में मप्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया, एवं महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति ब्रह्मचारी डॉ. गिरीश चन्द्र वर्मा भी उपस्थित रहेंगेेे। जिन महिला शक्ति का सम्मान होना है, उनमें दतिया की श्रीमती रमा आर्य का ज्ञान के क्षेत्र में, नर्मदापुरम की प्रज्ञा भारती का धर्मक्षेत्र में, बैतूल की श्रीमती साधना मिश्रा का कला क्षेत्र में, ग्वालियर की श्रीमती महिमा तारे का समाजसेवा के क्षेत्र में, भोपाल की सुश्री रिषिका आहूजा का उद्यम के क्षेत्र में, श्रीमती कोकिला सेठ का मातृत्व के क्षेत्र में और भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्रीमती सोनाली पोंकशे वायंगंकर का शक्ति क्षेत्र में सम्मान किया जाएगा। शनिवार को ही पंचपरिवर्तन, समग्र भारतीय जीवनचर्या, सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं सप्तमातृ के सम्मान के साथ समापन सत्र होगा।
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