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राजधानी

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सत्तापक्ष के गले की फांस बना खंती का कचरा, निगमायुक्त को सौंपे सर्वाधिकार, निगम परिषद की बैठक में 55 करोड़ की निविदा पर विफरा सत्तापक्ष के पार्षद

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भोपाल। भोपाल नगर निगम द्वारा आदमपुर खंती में पुराने कचरे के निष्पादन के लिए द्वितीय निविदा के माध्यम से मेसर्स सौराष्ट्र इनवायरो प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. को 55 करोड़, 54 लाख, 82 हजार 718 रुपये में काम सौंपे जाने संबंधी प्रस्ताव पर नगर निगम परिषद की बैठक में असमंजस की स्थिति बन गई। विपक्ष इस प्रस्ताव के विरोध में रहा तो सत्तापक्ष के पार्षद भी इसके समर्थन में नहीं दिखे। एमआईसी सदस्यों ने लिखित प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई तो महापौर ने स्पष्ट कहा कि प्रस्ताव में एमआईसी के अनुमोदन का उल्लेख गलत है। अंतत: सत्तापक्ष के प्रस्ताव पर अध्यक्ष ने इस मामले में निर्णय के सभी निगमायुक्त संस्कृति जैन को सौंपे। 

आदमपुर खंती के कचरे के निष्पादन के संबंध में उच्चतम न्यायालय के 19 फरवरी 2026 के आदेश और एनजीटी के निर्देशों का उल्लेखित कर आए इस प्रस्ताव में एमआईसी के अनुमोदन की बात भी लिखी गई। इस प्रस्ताव से विपक्ष ने पहले ही पल्ला झाड़ लिया। जबकि सत्तापक्ष के पार्षदों ने भी प्रस्ताव के समर्थन में हामी नहीं भरी। सत्तापक्ष के पार्षदों ने एमपी नगर के सीसी रोड मामले में भाजपा के पार्षदों के न्यायालय में चक्कर लगाने का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कहा कि निविदा में गड़बड़ी हुई तो ऐसा न हो उन्हें जेल जाना पड़े। विपक्ष ने कहा कि इस मामले में पहली बार में 33 करोड़ की निविदा निरस्त कर उसी एजेंसी को 55 करोड़ से अधिक में क्यों दी गई। हालांकि निगमायुक्त ने न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि कचरा शहर का है और हमें ही इसे साफ करना है। पूर्व में बजन के हिसाब से कचरा उठाने के टेंडर हुए इसीलिए आज तक आदमपुर खंती साफ नहीं हुई। इस निविदा में हर हाल में 330 दिन में एजेंसी को पूरा कचरा साफ करना होगा। काम के अनुपात में एजेंसी का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दूसरे शहरों में कचरा निष्पादन की दर इससे अधिक हैं। परिषद की अनुशंसा पर अध्यक्ष ने इस मामले के सर्वाधिकार निगमायुक्त को सौंपे।निगमायुक्त ने कहा कि उन्हें सिर्फ 5 करोड़ तक के राशि के पावर हैं। राशि की मंजूरी परिषद को ही देनी होगी। लेकिन अध्यक्ष ने कहा कि जो भी उचित हो, निर्णय वे स्वयं ले लें। परिषद आपके साथ है।  

अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए अड़ा सत्तापक्ष 

सदन में आदमपुर खंती के कचरा निष्पादन संबंधी प्रस्ताव में महापौर परिषद (एमआईसी) की अनुशंसा पर एमआईसी सदस्य रविन्द्र यति भडक़ गए। उन्होंने कहा कि परिषद ने अनुशंसा नहीं की। एमआईसी बैठके के बिन्दु सभी सदस्यों ने बैठकर एवं बार-बार चेक कर तैयार किए। लेकिन एजेंडे में इसे एमआईसी से अनुशंसित बता दिया गया। उन्होंने एजेंडा बनाने वाले अधिकारी-कर्मचारी पर वेतन काटने, निलंबन अथवा निष्कासन जैसी कार्रवाई नहीं होने तक अपनी सीट पर बैठने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि 420 नटवर लाल किसके इशारे पर काम कर रहे हैं, इससे एमआईसी पर अविश्वास पैदा होता है। इन्हें जेल भेजना चाहिए। महापौर सहित विपक्ष तथा सत्तापक्ष के पार्षदों ने भी उनका समर्थन किया। अध्यक्ष द्वारा निगमायुक्त को जांच के बाद कार्रवाई का के निर्देश दिए, तब सत्तापक्ष के पार्षद बैठे। इसी प्रकार एक प्रश्न के उत्तर में एमआईसी सदस्य आरकेएस बघेल ने भी निगम अधिकारियों पर फोन नहीं उठाने एवं हमेशा ही बैठक में रहने की बात कहते हैं। उन्होंने इस अधिकारी को हटाने की बात कही। अध्यक्ष ने निगमायुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए। 

परिषद में उठा स्लॉटर हाउस में गौकशी का मुद्दा 

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने स्लॉटर हाउस मामले को उठाकर दोषियों के नाम उजागर करने सहित भूमि लीज की जानकारी उजागर करने की बात कही। इससे पहले बैठक की शुरूआत में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। अध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट पटल पर है। महापौर ने कहा कि पिछली बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। एसआईटी जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रश्नकाल में शबिस्ता जकी ने मेसर्स तापी प्रिस्टेज प्रोडक्ट लिमिटेड के विरुद्ध जिला न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के बावजूद जलकार्य द्वारा राशि का भुगतान किए जाने, अर्थदण्ड/रॉयल्टी नहीं वसूले बिना अंतिम गणना के सुरक्षा निधि की राशि जारी करने का मुद्दा उठाया। उत्तर में रविन्द्र यति ने कहा कि प्रकरण न्यायालय प्रकरण में निगम पार्टी नहीं है। हालांकि इस प्रश्न के उत्तर के दौरान भी सदन में खूब हंगामा हुआ। 

इन पार्षदों ने भी सदन में पूछे प्रश्न 

योगेन्द्र सिंह गुड्डू ने एसडी मनी के नियमों तथा एसबीएम द्वारा ठेकेदारों को एसडी मनी का भुगतान किए जाने तथा मॉर्डन स्लॉटर हाऊस के लिए लगाए गए टेण्डर, जमीन, राशि के संबंध में तथा आवंटन के समय नियुक्त अधिकारी/कर्मचारियों पर कार्रवाई पर सवाल किया।श्रीमती शिरीन खान ने निगम के 85 वार्डों में पुरानी पाइप लाइन मरम्मत, सक्षम स्वीकृति, खर्च राशि, दूषित जल की जांच आदि के संबंध में रवन्दि यति से सवाल किया। श्रीमती नसीम गफूर ने जगदीश यादव से 85 वार्डों में शासकीय भूमि की जानकारी चाही। प्रताप वारे ने वार्ड 53 सोमैया महिन्द्र कार शोरूम की अवैध बाउंड्री एवं जुर्माना को लेकर सवाल किया। उत्तर में आनंद अग्रवाल से कार्रवाई की बात कही। मोहम्मद रियाज ने निगम द्वारा संचालित पशुगृह एवं गौशालाओं के संबंध में जानकारी मांगी। पार्षदों के तीन सवालों के उत्तर लिखित में दिए गए। 

14 पार्किंग के प्रस्ताव को मिली मंजूरी 

नगर निगम भोपाल में 14 स्थानों पर नवीन चिन्हित पार्किंग स्थलों को ई-निविदा के माध्यम से आवंटित किए जाने संबंधी विभागीय प्रस्ताव को निगम परिषद ने बहुमत से मंजूरी दे दी। हालांकि इस प्रस्ताव के दौरान सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने उनके क्षेत्रों में चिन्हित स्थानों पर पार्किंग बनाने की बात कही। कांग्रेस पार्षद गुड्डू शर्मा ने बिट्टन मार्केट सहित अन्य स्थानों पर अवैध पार्किंग और हाट बाजार से अवैध वसूली की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने शेष स्थानों की पार्किंग छोड़े जाने की बात कही। महापौर ने कहा कि पार्षदों से सुझाव मांगे गए हैं। जहां उचित स्थान बताएंगे पार्किंग बनाई जाएगी।