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एक बजे के स्लॉट पर 4 बजे रजिस्ट्री, मार्च के अंतिम सप्ताह में उमड़ रही भीड़, परेशान हो रहे पक्षकार
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- पंजीयन की ऑनलाइन व्यवस्था ने बढ़ाई पक्षकारों की परेशानी
भोपाल। अचल संपत्तियों के पंजीयन की ऑनलाइन व्यवस्था (सम्पदा-2.0) जहां पंजीयन अधिकारियों के लिए सुविधाजनक और समय की बचत करने वाली है। वहीं इस व्यवस्था ने पक्षकारों की परेशानी बढ़ा दी है। पंजीयन, मॉर्डिगेज अथवा डि-मॉर्डिगेज के लिए ऑनलाइन स्लॉट ले रहे हितग्राहियों की रजिस्ट्री स्लॉट में दर्शाए गए समय के हिसाब से नहीं, बल्कि टोकन के आधार पर हो रही है। स्लॉट और टोकन के समय में 4-5 घंटे तक का अंतर आ रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम महीने के कुल छह दिन शेष हैं। 1 अप्रैल से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संपत्ति की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से मूल्य बढऩे की संभावना के चलते संपत्ति पंजीयन के लिए पंजीयन कार्यालयों में भीड़ उमड़ रही है। राजधानी के तीनों रजिस्ट्रार कार्यालय के सभी उप रजिस्ट्रार सुबह 11 बजे कार्यालय पहुंच रहे हैं और आवंटित स्लॉट की बढ़ती संख्या के कारण रात 9 बजे के बाद तक रजिस्ट्री कर रहे हैं।
पक्षकारों के साथ गवाह भी हो रहे परेशान
संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया में क्रेता-विक्रेता के अलावा दो गवाह भी जरूरी है। गवाहों को पहले सर्विस प्रोवाईडर के यहां ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद रजिस्ट्रार कार्यालय की विंडो पर भी उन्हें फिर से वही प्रक्रिया दोहरानी होती है।नौकरी-पेशा अथवा कारोबार छोडक़र पक्षकारों के साथ गवाहों को भी लम्बा समय इंतजार करना पड़ रहा है।
मार्च की भीड़ में कम पड़ी कार्यालय की कुर्सी
आईएसबीटी स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय संभाग-2 और संभाग-3 के संयुक्त परिसर में आधा सैकड़ा से अधिक कुर्सी पक्षकारों के बैठने के लिए डाली गई हैं। लेकिन मार्च के अंतिम दिनों में हर समय कार्यालय में ढाई से तीन सौ लोगों की भीड़ रहती है। अधिकांश पक्षकार और गवाहों को खड़ेे होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
बैठने की व्यवस्था न शौचालय ठीक
ट्रायसिकल पर 80 वर्षीय बुजुर्ग बहिन को लेकर जिला पंजीयन कार्यालय पहुंचे सुभाष नगर निवासी सूर्यप्रकाश जोशी ने बताया कि उन्हें ढाई बजे का स्लॉट मिला था, इस कारण 2 बजे पंजीयन कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन शाम 4 बजे तक नंबर नहीं आया है। स्लॉट के सर्विस प्रोवाईडर ने टोकन लिया, जिसका नंबर 140 है। इतनी देर तक बैठने के लिए न तो पर्याप्त कुर्सियां और स्थान है और न ही पीने का पानी है। शॉैचालय भी गंदा और कमोड वाला नहीं है। बुजुर्गों को बैठाना बड़ा मुस्किल हो रहा है।
स्लॉट और टोकन ने बढ़ाई परेशानी
सुभाष नगर निवासी प्रकाश शर्मा ने बताया कि पक्षकारों को स्लॉट के समय पर बुलाया जाता है, लेकिन रजिस्ट्री टोकन नंबर के आधार पर ही हो पा रही है। इस स्लॉट सिस्टम में बुजुर्गों, दिव्यांगों के लिए आरक्षण या जल्दी पंजीयन जैसा प्रावधान भी नहीं है। स्लॉट के समय रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है तो टोकन के आधार पर समय मिलना चाहिए।
एक रजिस्ट्री में पूरा दिन बर्वाद
विनय निवासी अशोका गार्डन ने कहा कि संपदा-2 जैसी व्यवस्था में बताया गया था कि पक्षकार घर बैठे रजिस्ट्री कर सकते हैं। वास्तविकता इसके उलट है। पक्षकारों को सर्विस प्रोवाईडर के माध्यम से रजिस्ट्री प्रक्रिया करानी पड़ती है। इसके बाद क्रेता-बिक्रेता दोनों ही पक्षों को भौतिक रूप से पंजीयन प्रक्रिया सम्पन्न करने के लिए पंजीयन कार्यालय आना ही पड़ता है। स्लॉट और टोकन के फेर में पूरा दिन बर्वाद होता है, क्योंकि जिस समय का स्लॉट मिलता है, उस समय रजिस्ट्री नहीं होती है।
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