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मध्यप्रदेश

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राजपत्रित पदों को ठोकर मार परिवहन में बने टीएसआई

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परिवहन विभाग में अखिर ऐसा क्या? यहां उप निरीक्षक बनने अधिकारियों ने छोड़ी नौकरी  

उप निरीक्षक के आगे बौने साबित हुए डीएसपी, वैज्ञानिक और महिला सुपरवाईजर जैसे पद 

भोपाल। मध्यप्रदेश परिवहन विभाग का उप निरीक्षक पद कितना महत्वपूर्ण है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस पद पर पदस्थापना के लिए राजपत्रित अधिकारियों तक ने अपने पदों को ठोकर मार दी। डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक और महिला बाल विकास विभाग में महिला पर्यवेक्षक नौकरी छोड़ टीएसआई बन गईं। जबकि डीएसपी के पद पर चयन के बाद भी एक टीएसआई ज्वाइनिंग के लिए नहीं पहुंचे। एक पूर्व सैनिक ने भी डाक विभाग की नौकरी छोड़ परिवहन विभाग में उप निरीक्षक पद पर नौकरी करना पसंद किया। 

उल्लेखनीय है कि पहले चेक पोस्टों पर अवैध वसूली, इसके बाद पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापे और छापों में मिली सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति के बाद परिवहन विभाग चर्चाओं में रहा है। सौरभ शर्मा की परिवहन विभाग में नियुक्ति के लिए अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को ताक पर रखा गया। सौरभ के पिता स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक थे, लेकिन उसे परिवहन में आरक्षक पद पर नौकरी के लिए कई नियमों को ताक पर रखा गया, बल्कि आरक्षक जैसे छोटे से पद के लिए तत्कालीन दो मंत्रियों तक अनुशंसा की नोटसीट चलीं। लेकिन सौरभ के ठिकानों पर छापों में मिली संपत्ति के बाद सवाल खड़े हुए कि 8 साल तक नौकरी करने वाले परिवहन आरक्षक पर इतनी संपत्ति तो चेकपोस्टों का प्रभार संभालने वाले आरटीआई और टीएसआई की संपत्तियां कितनी? 

टीएसआई जिन्होंने छोड़ी सरकारी नौकरियां 

विमित कुमार गुप्ता: भिण्ड जिले के निवासी श्री गुप्ता डीआरटीओ में वैज्ञानिक थे। मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से परिवहन में उप निरीक्षक पद पर चयन हुआ। वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ 17 अक्टूवर 2018 को टीएसआई पद पर ज्वाइन किया। 

अंकुर गुप्ता : परिवहन विभाग में उप निरीक्षक पद पर चयनित हुए भोपाल के श्री गुप्ता 17 नवम्बर 2017 को पदभार ग्रहण किया। इस बीच मप्र लोक सेवा आयोग  के माध्यम से उनका चयन उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हो गया। नए पद पर ज्वाइन करने के लिए उन्होंने टीएसआई पद से त्यागपत्र भी दिया। लेकिन उन्हें डीएसपी पद नहीं भाया और उन्होंने आरटीआई पद से त्यागपत्र के लिए दिया आवेदन वापस ले लिया। 

प्राची शर्मा : ग्वालियर निवासी प्राची शर्मा महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक (महिला सुपरवाईजर) थीं। इस बीच उनका चयन परिवहन विभाग में उप निरीक्षक के पद पर हुआ। उन्होंने पर्यवेक्षक की जगह टीएसआई की नौकरी को चुना और 1 जनवरी 2018 को परिवहन विभाग में ज्वाइन किया। 

विक्रम सिंह ठाकुर : पूर्व सैनिक रहे श्री ठाकुर जून 2019 से पहले तक डाक विभाग में शासकीय सेवा में थे। एमपी पीएससी में अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे से उनका चयन परिवहन विभाग में उप निरीक्षक पद पर हुआ। केन्द्र सरकार की नौकरी छोड़ उन्होंने मप्र परिवहन विभाग में टीएसआई के पद पर ज्वाइन किया।    

आरक्षक पद के लिए उप निरीक्षक ने छोड़ी नौकरी

पुलिस विभाग में उप निरीक्षक रहे कौशल किशोर द्विवेदी वर्तमान में परिवहन विभाग में आरक्षक हैं। यहां आरक्षक पद के लिए उन्होंने पुलिस में तीन केडर ऊपर की नौकरी छोड़ दी। पुलिस में श्री द्विवेदी की पदस्थापना फिंगर प्रिंट शाखा में थी। 

डिप्टी कलेक्टर पद छोड़ बने एआरटीओ 

विभागीय सूत्र बताते हैं कि परिवहन विभाग में भोपाल संभाग के एक जिले में पदस्थ सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था।  लेकिन परिवहन विभाग के पद के लिए उन्होंने डिप्टी कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर ज्वाइनिंग नहीं ली। उल्लेखित नाम और पद तो उदाहरण मात्र हैं। बड़े पदों की नौकरी छोडक़र परिवहन विभाग में टीएसआई या आरक्षक जैसे पदों पर नियुक्ति पाने वाले ऐसे और भी कई कर्मचारी हैं। 

‘प्रमुख प्रशासनिक और जिम्मेदारी वाले पदों की नौकरी छोडक़र परिवहन विभाग में टीएसआई जैसे छोटे पद पर अगर कोई आ रहा है तो यह गलत है, ऐसा नहीं करना चाहिए। हो सकता है कि ऐसा करने वालों ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा जैसे लोगों की कहानी सुन रखी होगी।’

एन.के.त्रिपाठी (सेवानिवृत्त भापुसे)

पूर्व परिवहन आयुक्त, मप्र