Breaking News:
राजनीति
उप्र से खरीदकर मप्र में समर्थन मूल्य पर बिक रहा गेहूँ, पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने वीडियो दिखाकर लगाए आरोप
राजनीति
भोपाल। मप्र के पूर्व सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और किसानों से धोखाधड़ी किए जाने के आरोप लगाए हैं। मीडिया के सामने दो वीडियो प्रसारित कर उन्होंने आरोप लगाया कि कई भाजपा पदाधिकारी अधिकारियों से सांठगांठ कर भिण्ड जिले की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश से 21 सौ-22 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव में गेहूँ खरीदकर मप्र में समर्थन मूल्य पर बेचा जा रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि भिंड जिले, विशेषकर लहार और रौन क्षेत्र में मप्र-उप्र सिंडिकेट के माध्यम से यह करोड़ों रुपये का घोटाला चल रहा है।
खरीदी से पहले गोदाम में मिला 5000 क्विंटल गेहूँ
डॉ. गोविंद सिंह ने बताया कि विगत 14 अप्रैल की शाम मप्र में भिण्ड जिले में खरीदी शुरू होने से पहले ही लहार क्षेत्र के आलमपुर में मण्डी स्थित उपार्जन केन्द्र पर तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक और पटवारी के साथ छापा मारा तो यहां 400 बोरी गेहंू वेयरहाउस में एवं बाहर कुल 5 हजार क्विंटल गेहँॅू मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के स्लॉट बुक होने से पहले ही नागरिक आपूर्ति निगम का बारदाना (बोरियां) माफियाओं तक पहुंचा दिया गया। जिला प्रशासन की छापेमारी में हजारों क्विंटल गेहूं खुले में और बोरियों में भरा मिला, जिसे आनन-फानन में मजदूरों से भरवाया जा रहा था। भिंड जिले की सहकारी समिति अमाहा के सचिव पहले पकड़े जा चुके हैं।
हर केन्द्र से 5 लाख वसूल रहे जिला खाद्य अधिकारी
डॉ. गोविंद सिंह ने आरोप लगाया कि भिण्ड जिले में किसानों की पहुंच से दूर स्थानों पर खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं। समितियों को खरीद केंद्र बनाने के लिए जिला खाद्य अधिकारी 5 लाख रुपए प्रति केंद्र वसूल करते हैं। जो समितियां रिश्वत नहीं दे पातीं, उन्हें काम नहीं मिलता और दूरस्थ क्षेत्रों में खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मेहगांव क्षेत्र के नरेश सिंह नाम के एक कार्यकर्ता ने जब तक रिश्वत नहीं दी उसके वेयरहाउस में माल नहीं रखा गया। 3 मार्च 2024 का वीडियो दिखाते हुए आरोप लगाया कि 5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ, तभी उसके वेयर हाउस में माल रखा गया।
बंजर भूमि में गेहूँ उगा रहा माफिया
डॉ. गोविंद सिंह ने आरोप लगाया कि फर्जी उपार्जन दिखाने के लिए माफिया किसान बनकर उस भूमि पर भी गेहूँ की खेती दिखा रहा है, जहां खेती हो ही नहीं सकती। वास्तविक किसान परेशान है। पोर्टल पर उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। सर्वर में गड़बड़ी के चलते उसका स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है। सरकारी केंद्रों पर जगह न मिलने और माफियाओं के कब्जे के कारण किसान मंडियों में 2122 रुपए के कम भाव पर गेहूं बेचने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सोसायटियों को दरकिनार कर दागी और ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को खरीदी का जिम्मा सौंपा गया है।कांग्रेस नेता ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अन्य खबर
ट्रेंडिंग खबरें
मध्यप्रदेश
रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की...
05-05-26
राजनीति
मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले...
04-05-26
राजधानी
कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार
04-05-26
राजनीति
पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश...
04-05-26
राजधानी
‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में...
04-05-26