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मध्यप्रदेश
मप्र उच्च न्यायालय ने दिए परिवहन विभाग के सभी बंद चेकपोस्ट 30 दिन में खोलने के आदेश
मध्यप्रदेश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर एक जुलाई 2024 से बंद किए गए मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के सभी चेकपोस्ट एक महीने में फिर से खोले जा सकते हैं। रजनीश त्रिपाठी द्वारा लगाई गई याचिका की सुनवाई के बाद परिवहन विभाग के अधिकारियों को इस तरह के निर्देश मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने दिए हैं।
मध्यप्रदेश के राजमार्गों पर भारी वाहनों में ओवर लोडिंग से बड़े स्तर पर हो रहे सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान, दुर्घटनाएं, पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव जैसी समस्याओं को लेकर दायर 2006 में दायर यचिका क्रमांक 12203/2006 के संबंध में उच्च न्यायालय के पूर्व में जारी आदेशों का पालन नहीं होने पर मप्र परिवहन विभाग के सचिव आईएएस मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारियों के विरुद्ध यह नई याचिका लगाई गई थी। सुनवाई के बाद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने विभाग द्वारा बंद किए गए सभी चेकपोस्ट को 30 दिवस में फिर से चालू के निर्देश दिए हैं। याचिका के निराकण के साथ न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि विभागीय अधिकारी वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच हेतु अन्य तरीकों को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं, परंतु इस न्यायालय के समक्ष दिए गए वचन का पालन किया जाना अनिवार्य है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 30 दिन का समय चेकपोस्ट पुन: स्थापित करने के लिए दिया है। यदि इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता तो याचिकाकर्ता अवमानना याचिका लगाकर इस याचिका को पुनर्जीवित कर सकता है। याचिकाकर्ता रजनीश त्रिपाठी की ओर से पैरवी अभिभाषक जुबिन प्रसाद एवं भानु प्रकाश ने एवं शासन की ओर से सुश्री अंजली मिश्रा ने की।
अवमानना के लिए अधिकारियों को मिली माफी
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि न्यायालय में दिए गए वचन का पालन नहीं किया जाता है तो न्यायालय द्वारा पारित आदेश की अवहेलना मानी जाती है और यह न्यायालय के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है। अधिकारियों द्वारा चेकपोस्ट बंद करने के संबंध में पूर्व में जो आदेश जारी किया था, उसे न्यायालय ने 4 सितम्बर 2018 के आदेश से स्थगित कर दिया था। विभागीय अधिकारियों ने कई जवाब और तर्क भी रखे, लेकिन न्यायालय ने उन्हें संतोषजनक नहीं माना, क्योंकि न्यायालय द्वारा आदेश को स्थगित किए जाने के बावजूद अधिकारियों ने फिर से चेक पोस्ट बंद कर दिए। न्यायालय ने कहा कि यह कृत्य इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश और प्रतिवादियों द्वारा दी गई वचनबद्धता की अवहेलना के समान है। हालांकि न्यायालय ने प्रतिवादी अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक निर्देश जारी नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि वह प्रतिवादियों को जनहित याचिका में पारित आदेश का पालन करने हेतु एक और अवसर प्रदान करना उचित समझता है।
न्यायालय के आदेश से क्या होगा बदलाव
परिवहन विभाग अगर 30 दिन में न्यायालय के आदेश का पालन करता है तो प्रदेशभर में अस्थायी चेकपॉइंट की व्यवस्था समाप्त कर पहले की तरह फिर से चेकपोस्ट तैयार किए जाएंगे। मप्र की सीमा से सटे दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जाएगी और क्षमता से अधिक भार और ऊंचाई (ओवर वेट-ओवर लोड) सहित अन्य कमियों वाहे प्रत्येक वाहन को रोककर जांच की जाएगी। कमियां मिलने पर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी।
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