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राजधानी

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महिला आरक्षण के समर्थन में मंत्री कृष्णा गौर का सदन में सबसे प्रभावी भाषण, बोलीं-कांग्रेस ने चूर-चूर किया आधी आबादी का सपना

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भोपाल। महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में बुलाए गए मप्र विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर सबसे प्रभावी भाषण मप्र की राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर का रहा। चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के भी कई सदस्यों ने उनके भाषण की प्रशंसा और उल्लेख किया। 

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था। जब यह अधिनियम लोकसभा में आया था महिलाओं के सपनों को पंख लग गए थे। उन्हें लगा कि वे भी संसद में जाकर देश के निर्माण में नीति-निर्धारण में सहभागिता करेंगी। लेकिन कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने देश की आधी आबादी महिलाओं के सपनों को चूर-चूर कर दिया। महिलाओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर कुठाराघात किया। कांग्रेस ने आधी आबादी का मान-सम्मान गिराया। इससे कांग्रेस की मानसिकता उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गलती कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से हुई है तो प्राश्चित मप्र कांग्रेस कमेटी द्वारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पांडवों ने कौरवों से 5 गांव मांगे थे नहीं दिए थे। अब उसी वंश के मोहन ने प्रस्ताव रखा है। अजय सिंह ने कहा कि अच्छा बोल रही हो, मोहन जी की जगह आप ही आ जाओ। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज मोहिनी एकादशी है। भगवान विष्णु ने मोहनी अवतार लेकर भस्मासुर को मारा था। भस्मासुर रूपी विरोधियों को माने के लिए ही यह बिल आया है। हालांकि अध्यक्ष ने संशोधन करते हुए कहा कि यह बिल नहीं, प्रस्ताव है।  कांग्रेस विधायक अजय सिंह की एक अन्य आपत्ति पर श्रीमती गौर ने कहा-आप सुन नहीं सकते तो कान में तेल डालकर आईए। आप महिलाओं की बात सुन नहीं सकते। 

विपक्ष की अशासकीय संकल्प की मांग अस्वीकार

 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 543 लोकसभा सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विपक्ष नियम 117 के तहत चर्चा कराना चाहता है। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शासकीय संकल्प ग्राह्य हो चुका है। अब तक की परंपरा के अनुसार शासकीय संकल्प का प्रस्ताव आने के बाद अशासकीय संकल्प लेने का प्रावधान नहीं है। अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा, चूंकि विशेष सत्र का विषय पहले से निश्चित है। जब विषय पर संकल्प और प्रस्ताव आ चुका है तो अन्य विषय पर अशाकीय संकल्प नहीं आ सकता।कुछ सदस्यों ने संशोधन पर चर्चा कराने के लिए पत्र दिए हैं। यह विधि अनुसार तो नहीं हैं, फिर भी पूर्व में 3-4 बार संशोधन पर चर्चा के प्रस्ताव स्वीकार किए गए हैं। तो इस बार भी संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा कराई जाएगी। अध्यक्ष ने विपक्ष के अशासकीय संकल्प को अस्वीकार एवं संशोधन पर चर्चा कराए जाने की बात कही तो नेता प्रतिपक्ष सहित पूरे विपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया। 

महिला आरक्षण पर क्या बोले सत्ता और विपक्ष के विधायक

कैलाश विजयवर्गीय : नारी शक्ति वंदन का यह 106वां संशोधन विधेयक था। स्पष्ट था कि यह परसीमन के साथ होगा। 2023 में जब यह विधेयक पास हुआ, उस समय जातिगत जनगणना का आभाष भी नहीं था। 140 करोड़ लोगों की जातिगत जनगणना में बहुत समय लगेगा। सरकार चाहती है कि महिलाओं को 2029 में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।  

झूमा सोलंकी (कांग्रेस)- सत्ता में बने रहने का षड्यंत्र न बनाएं। महिलाओं को आरक्षण देना है तो परसीमन ओर जनगणना से इसे पीछे करने का काम न करें और वर्तमान में उपलब्ध सीटों पर ही इसे लागू करें। 

हेमंत खंडेलवाल (भाजपा) - देश की आधी आबादी को सौ प्रतिशत न्याय नहीं मिलेगा तब तक देश अग्रणी देशों में शामिल नहीं हो सकेगा। लाडली बहना और लाडली लक्ष्मी सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र और मप्र की भाजपा सरकार महिलाओं-बेटियों के कल्याण के लिए संकल्पित है।   

मोहन वाल्मीक (कांग्रेस)- भाजपा नेता महिलाओं को आरक्षण देना नहीं चालते। मप्र में गरीब बेटियों के सामूहिक विवाह में शर्तें जोड़ दी गई हैं। एनसीआरबी के आंकड़े महिला अत्याचार और शोषण ऊपर हैं। 7.7 लाख बेटियां-महिलाएं गुम हैं।

अर्चना चिटनिस (भााजपा)- महिला आरक्षण को लेकर देश की महिलाएं आनंदित और आश्वस्त थीं। लेकिन कांग्रेस और सहयोगी दलों द्वारा विधेयक को गिराने से दुखी और आक्रोशित हैं। 

डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह (कांग्रेस)- महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मंशा होती तो 543 सीटों पर देदो। बंगला चुनाव को लेकर महिला आरक्षण बिल लेकर आए। 

संपत्तियां उइके (भाजपा)- संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा को देश की 70 करोड़ महिलाएं देख रही थीं। कांग्रेस द्वारा महिलाओं के अपमान को पूरे देश की बहिनों ने देखा है। समय आने पर कांग्रेस से बदला लेंगी। 

अनुभा मुंजारे (कांग्रेस)- कांग्रेस ने पहली राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री दी। 6 माह से सरकार ने मेरा पीए छीन लिया है। कलेक्टर दूसरा पीए देने की बात कह रही हैं। मेरे साथ ही अन्याय तो ये कैसा महिला सम्मान। 

गोपाल भार्गव (भाजपा)- भारत में नारी की शक्ति के रूप में उपासना होती है। भलें अभी महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका हो। भाजपा फिर से प्रयास करेगी। महिला केवल वोट बैंक नहीं, उन्हें उनका अधिकार दिलाना होगा। 

लखन घनघोरिया (कांग्रेस)- इस बैठक का कोई औचित्य नहीं था। ये भ्रामक प्रक्रिया और प्रपंच है। 2023 में पास हो चुके विधेयक को उसी समय लागू किया जा सकता था।

हेमंत कटारे (कांग्रेस)- पिछले सात वर्षों से महिला आयोग का गठन नहीं हुआ है और कार्यालय निष्क्रिय पड़ा है। प्रदेश में महिलाओं के लापता होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने महिला विधायकों के कुछ निजी प्रकरणों का उल्लेखकरते हुए कहा कि ऐसे में सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की बात कैसे कर सकती है।

निर्मला भूरिया (भाजपा)- नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का मील का पत्थर है। नारी सशक्तिकरण अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता बन चुका है। अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

सुश्री उषा ठाकुर (भाजपा)- महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। प्रधानमंत्री कोई भी विषय सदन में बिना दृढ़ निश्चय के नहीं लाते, उनका निर्णय ‘अंगद के पैर’ की तरह अटल होता है। यह विधेयक पारित होकर रहेगा। देश में एक-तिहाई प्रतिनिधित्व महिलाओं को मिलना तय है। विपक्ष जितना विरोध करना चाहे, कर ले। 

रीति पाठक (भाजपा)- कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने एक ऐसा इतिहास बनाने की कोशिश की, जिसे वे अपनी जीत मानते हैं। उनके अनुसार, संसद में महिलाओं के लिए लाए गए बिल का कांग्रेस ने समर्थन नहीं किया, जिसके कारण वह पारित नहीं हो सका।राहुल गांधी ने महिला बिल का समर्थन नहीं किया। 

पुलिस ने रोका विधायक का ट्रैक्टर-ट्रॉली 

विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा जा रहे थे, लेकिन मंत्रालय के आगे लगी बैरीकेडिंग पर पुलिस नेउन्हें रोक लिया। शाह का कहना था कि उन्होंने ट्रैक्टर का पास बनवाया है, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक्टर ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर पुलिस और विधायक के बीच जमकर बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में विधायक गेंहू का गठ्ठा लेकर विधानसभा परिसर में चले गए।