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राजधानी

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15 साल से केन्द्र में अटके ‘एमपीकोका’ विधेयक को वापस लेगी सरकार, मंत्रि-मंडल ने अलग-अलग विभागों के 21 प्रस्तावों को दी स्वीकृति

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा से पास होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए 15 साल पहले केन्द्रीय गृह विभाग को भेजे गए मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां और संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010 (एमपीकोका) को राज्य सरकार वापस लेगी। इस विधेयक की वापसी से संबंधित प्रस्ताव को मंगलवार को मंत्रि-परिषद ने मंजूरी दे दी। 

विधेयक क्यों लिया वापस : ‘एमपीकोका’ विधेयक में शामिल किए गए विशेष प्रावधानों में से अधिकांश को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय दंड संहिता में शामिल कर दिया है। नक्सलवाद के सफाए के बाद कुछ प्रावधान औचित्यहीन भी हो चुके हैं। इसलिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अभिमत के बाद राज्य सरकार ने इस विधेयक को वापस लेने का निर्णय लिया। 

15 साल पुराने प्रस्तावित कानून में कड़े प्रावधान : 25 मई 2010 को मप्र विधानसभा से पारित होने के बाद ‘मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां और संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010’ को उसी दिन राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केन्द्रीय गृह विभाग को भेजा गया था।  लेकिन 15 सालों से इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी। राज्य में आंतकवाद और नक्सलवाद के साथ-साथ इनके मददगार स्लीपरसेल के खात्मे के लिए प्रदेश सरकार यह विधेयक लेकर आई थी। इस प्रस्तावित कानून में विशेषकर भू-माफिया, शराब माफिया, खनन माफिया और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कड़े प्रावधान थे। इस कानून के तहत, संगठित अपराध के माध्यम से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने, अपराधियों से जब्त की गई संपत्ति को गरीबों में वितरित करने, मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष त्वरित न्यायालयों का गठन, कानून में गवाहों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान हैं ताकि वे निडर होकर गवाही दे सकते थे। हालांकि कुछ आपत्तियों के चलते केन्द्र ने इसे मंजूरी नहीं दी। 

6 साल पुरानी 7.73 लाख मीट्रिक टन धान नीलामी से बेचेगी सरकार 

मध्यप्रदेश सरकार खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से शेष बची 7.73 लाख मीट्रिक टन धान को ई-नीलामी के माध्यम से बेचेगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इसके साथ विभिन्न विभागों के 21 अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने लोक निर्माण विभाग की 26,311 करोड़ रुपये की परियोजनाओं सहित कुल 53 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।

ओबीसी छात्रों को दिल्ली में भी छात्रगृह योजना का लाभ 

पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्र गृह योजना का लाभ  दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढऩे वाले मप्र के ओबीसी छात्र-छात्राओं को जारी रखने के प्रस्ताव को मंंत्रि-परिषद ने मंजूरी दी है। इस योजना में पहले 1550 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, अब 10 हजार रुपए मिलेंगे। लाभ पाठ्यक्रम पूरा होने तक मिलेगा तथा प्रतिवर्ष मप्र के सौ नए विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। 

कैबिनेट में इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी

- लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति।

- गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में 134 पीजी सीट वृद्धि योजना में ७९.16 करोड़ के निर्माण कार्यों की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति।

- श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार की 174 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति।

- उच्च न्यायालय की अवमानना याचिका में शकूर खान को पेंशन देने का निर्णय एवं संजय कुमार गुप्ता और अन्य 8 की याचिका मामले में अमीन पद का वेतनमान स्वीकृत करने की के प्रस्ताव पर उच्च न्ययालय के आदेश के आधार पर फैसले का निर्णय। 

- विद्युतविहीन आँगनवाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था के लिए 38 हजार 901 ऑगनवाड़ी भवनों में बाहय विद्युतीकरण संबंधी योजना की 16 वें वित्त आयोग की निर्धारित पांच साल की अवधि के लिए स्वीकृति एवं निरंतरता के लिए 80.41 करोड़ की स्वीकृति। 

पीडब्ल्यूडी की इन परियोजनाओं को मिली मंजूरी 

- मरम्मत और सुधार कार्य समेत अन्य योजनाओं के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि तक काम जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी। 

- केंद्रीय सडक़ अधोसंरचना निधि की योजनाओं को 16वें वित्त आयोग में जारी रखा जाना। 

- पीडब्ल्यूडी के एफ टाइप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास और गैर आवासीय भवनों की मरम्मत का काम 16वें वित्त आयोग से जारी रखा जाना। 

- 16वें वित्त आयोग के अंतर्गत ही लोक निर्माण विभाग की भू अर्जन मुआवजा संबंधी योजा, भारतीय सडक़ कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन का भुगतान, मुख्य जिला मार्ग, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण का काम जारी रखने का प्रस्ताव।