अपराध

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फर्जी फर्म के खाते में कराया 1.55 करोड़ का सरकारी भुगतान, पूर्व प्राचार्यों, लेखापाल सहित 7 पर ईओडब्ल्यू ने की एफआईआर

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भोपाल। राजधानी के शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय (मुगालिया छाप) में मेस भुगतान के नाम पर की गई करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने पूर्व प्राचार्यों, लेखापाल सहित कुल 7 आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। 

धोखाधड़ी की शिकायत सौरभ गुप्ता निवासी अयोध्या नगर, भोपाल ने ईओडब्ल्यू से की थी। ईओडब्ल्यू की जांच में कुल 1,55,49,498 रुपये का गबन सामने आया है। इस मामले में 7 व्यक्तियों, फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड गौरव शर्मा, फर्जी फर्म के मालिक हर्ष मरजानी, कर्मचारी कुलदीप शुक्ला, विद्यालय के तीन पूर्व प्राचार्य विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया एवं वीरेन्द्र दुबे और विद्यालय की तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 

श्रमिकों के बच्चों की मेस की राशि में किया गबन 

वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रदेश के चार श्रमोदय विद्यालयों-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में मेस संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। भोपाल और इंदौर विद्यालय का ठेका कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मिला था। कंपनी द्वारा विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता था तथा भुगतान कंपनी के बैंक ऑफ बड़ौदा, गोवा शाखा स्थित खाते में किया जाता था। जांच में पता चला कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर गौरव शर्मा ने धोखाधड़ी की साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द हटाकर ‘कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस’ नाम से एक फर्जी फर्म तैयार कराई। यह फर्म उसके परिचित हर्ष मरजानी के नाम से बनाई गई और उसका बैंक खाता ए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंदौर में खुलवाया गया। 27 जून 2024 को गौरव शर्मा ने फर्जी लेटरहेड पर पत्र तैयार कर अपने कर्मचारी कुलदीप शुक्ला के माध्यम से विद्यालय की अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा को सौंपा, जिसमें कंपनी का बैंक खाता बदलने की जानकारी दी गई थी। पत्र में कहा गया था कि भविष्य के सभी भुगतान नए बैंक खाते में किए जाएं।

आकाउंटेंट ने इस तरह की धोखाधड़ी 

अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा ने बैंक खाता बदलने से पहले नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारियों (संयुक्त संचालक) से कोई मंजूरी नहीं ली। वह अधिकारियों से भुगतान पास कराने के लिए नोटशीट पर तो असली कंपनी का नाम (कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड) ही लिखती थी, लेकिन जब चेक काटने की बारी आती, तो जानबूझकर उसमें से ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द गायब कर देती थी ताकि पैसा फर्जी फर्म के खाते में चला जाए। इस पूरी धोखाधड़ी में स्कूल के तीन तत्कालीन प्राचार्यों (विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेन्द्र दुबे) ने भी जानबूझकर इन फर्जी चेकों पर अपने हस्ताक्षर किए और करोड़ों रुपये गौरव शर्मा की डमी कंपनी में ट्रांसफर होने दिए। 

खाता बदलने का पत्र बाद में, पहले हुआ भुगतान

जांच में सामने आया कि बैंक खाता बदलने का आधिकारिक पत्र 27 जून 2024 को स्कूल को दिया गया था, लेकिन इस फर्जी बैंक खाते में 21,95,255 रुपये का पहला भुगतान 20/21 अक्टूबर 2023 को ही कर दिया गया था। फरवरी 2025 में जब एक नए प्राचार्य प्रदीप राजावत स्कूल आए, तो उन्होंने इस चोरी को पकड़ लिया था। उन्होंने चेक पर खुद पेन से ‘प्रा. लि.’ शब्द जोडक़र असली कंपनी को 21.95 लाख रुपये का सही भुगतान किया था। लेकिन प्रदीप राजावत का स्थानांतरण होते ही नए प्राचार्य वीरेन्द्र दुबे से मिलकर अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा और वीरेन्द्र दुबे ने फिर से वही पुराना खेल शुरू कर दिया। 

धोखाधड़ी, जालसाजी की धाराओं में प्रकरण दर्ज 

प्राथमिक जांच के बाद मिले साक्ष्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने सभी 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस 2023) की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 318(4) (धोखाधड़ी), 338 व 336(3) (दस्तावेजों में जालसाजी), 340(2) (फर्जी दस्तावेजों का असली रूप में उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही शुरू की है।