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टीटी-एमपी नहीं, हमारे प्रेरणापुंज महापुरुष हैं ये
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उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे शहर में लगे से संकेतक बोर्ड
भोपाल। भारत के गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के त्याग, बलिदान और साहस को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज के रूप में प्रदर्शित करने के लिए शहर के चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर वीर बलिदानियों और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। कई स्थानों के नाम भी महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। लेकिन अंग्रेजियत के प्रभाव में और ‘शॉर्ट नेम’ के प्रचलन के चलते चौराहों और चौराहों के नाम टीटी-एमपी-जेपी जैसे शब्दों में उलझकर रह गए हैं। सार यह है कि यह ‘शॉर्ट नेम’ उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे हैं, जिसके लिए इन चौराहों या स्थानों का नाम महापुरुषों के नाम पर रखा गया था।
महापुरुषों को पीछे करने सरकारी विभाग सबसे आगे
कई शासकीय स्थलों, अधिकारियों के कार्यालयों और थानों के बोर्डों के अलावा नगर निगम, स्मार्टसिटी, लोक निर्माण विभाग और राजधानी परियोजना प्रशासन के संकेतक बोर्डों पर भी इन स्थानों को महापुरुषों के शॉर्ट नेम अथवा आधे-अधूरे नामों से दर्शाया जा रहा है।
तात्याटोपे बन गए ‘टीटी’
शहर के न्यू मार्केट क्षेत्र से सटे ‘टीटी नगर’ का पूरा नाम तात्याटोपे नगर है। लेकिन यहां निवासरत नई पीढ़ी टीटी नगर का मतलब तक नहीं जानती। यहां चौराहे पर 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति के महान सेनानी तात्याटोपे की प्रतिमा जरूर लगी है, लेकिन सामने ही बना पुलिस थाना और सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय इसे टीटी नगर बता रहे हैं। कई सरकारी संकेतकों पर क्षेत्र को टीटी नगर लिखा देखा जा सकता है।
‘एमपी’ मतलब मप्र नहीं, ‘महाराणा प्रताप’
राजधानी का सबसे प्रमुख स्थल ‘एमपी नगर’ के नाम से जाना जाता है। यह दो जोन एमपी नगर-1 और एमपी नगर-2 में विभाजित है। दोनों जोन के बीच में ‘चेतक’ पर सवार वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ़ प्रतिज्ञ मुगल आक्रांता अकबर की अधीनता को अस्वीकार करने वाले ‘महाराणा प्रताप’ की प्रतिमा को देखा जा सकता है। सामने पुलिस चौकी पर एमपी नगर नजर आता है तो निगम के संकेतक बोर्ड चौराहे को तो ‘महाराणा प्रताप नगर’ बताता है, लेकिन क्षेत्र को ‘एमपी नगर-जोन-1’ ही बताता है। शहर में लगे लगभग सभी संकेतक भी ‘एमपी नगर’ ही हैं और क्षेत्र का संबोधन भी इसी ‘शॉर्ट नेम’ से ही होता है।
‘लोकनायक जयप्रकाश’ बने ‘जेपी’
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 1970 में लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ ‘समर्पण क्रांति’ आंदोलन के जनक जयप्रकाश नारायण, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है। भोपाल में उनके नाम से जिला अस्पताल है। अस्पताल परिसर के संकेतकों पर तो उनका पूरा नाम उल्लेखित है। लेकिन आसपास के कार्यालयों, बैंक आदि पर यह ‘जेपी अस्पताल’ ही है। ज्यादातर शहरवासी भी इसे ‘1250’ अथवा जेपी अस्पताल के नाम से ही जानते हैं।
आधे-अधूरे नामों से भी जाने जा रहे महापुरुष
‘शास्त्री ब्रिज’, पटेल नगर, शिवाजी नगर, गांधी मार्केट जैसे कई स्थानों, सडक़ों, संस्थानों और पुलों आदि के नाम हैं, जो आधे-अधूरे नामों से पहचाने जाते हैं। भारत की नई पीढ़ी उन महापुरुषों के नाम और योगदान से ही परिचित नहीं हो पा रही है, जिसके उद्देश्य से इनका नामकरण किया गया है।
‘नगर निगम में चौराहों, स्थानों का नामकरण महापुरुषों के पूर्ण नामों के साथ हुए हैं। हालांकि संकेतकों और आम बोलचाल में शॉर्ट फॉर्म उपयोग हो रहा है। निगम के सभी बोर्डों पर महापुरुषों के पूर्ण नाम उल्लेखित कराए जाने और आम बोलचाल में भी पूर्ण नाम ही आ सकें, नगर निगम भोपाल की ओर से ऐसे प्रयास भी होंगे।’
किशन सूर्यवंशी
अध्यक्ष-नगर पालिक निगम, भोपाल
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