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10 से अधिक राज्यों के युवाओं ने किया सामूहिक योग, आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के 50 वें अद्वैत जागरण शिविर का शुभारंभ
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भोपाल। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास (संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन) द्वारा वेदांत दर्शन और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2020 से नियमित अद्वैत जागरण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में, 50वें अद्वैत जागरण शिविर का शुभारंभ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के तपोवन कुटी, उत्तरकाशी में हुआ।
शिविर न्यास के न्यासी स्वामी हरिब्रह्मेन्द्रानंद तीर्थ के पावन सान्निध्य में आयोजित हो रहा है। इस शिविर में 10 से अधिक राज्यों के युवा, आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रकरण ग्रंथ ‘तत्त्वबोध’ का अध्ययन गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से करेंगे।
गंगा तट पर लिया एकात्मता का संकल्प
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और शिविर के उद्घाटन अवसर पर हिमालय के दिव्य क्षेत्र उत्तरकाशी में विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने सामूहिक रूप से भगीरथी गंगा के तट पर योग किया और एकात्मता का संकल्प लिया।
चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन, वेलियानाड केरल में भी देश -विदेश के 50 युवाओं की उपस्थिति में 51 वें अद्वैत जागरण शिविर का शुभारंभ स्वामी शारदानंद सरस्वती के सान्निध्य में हुआ, इस अवसर पर युवाओं ने शिविर की शुरुआत योग एवं ध्यान के साथ की।
वर्षभर में आयोजित होंगे कुल 22 शिविर
देश-विदेश के 18 से 32 वर्ष के युवाओं एवं 32 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए ‘अद्वैत वेदांत’ के गहन अध्ययन और अनुभव हेतु वर्ष 2026 में न्यास द्वारा देश के विभिन्न आश्रमों एवं संस्थानों में प्रतिष्ठित आचार्यों के मार्गदर्शन में 22 अद्वैत जागरण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
इन राजयों में आयोजित हो रहे शिविर
वर्ष 2026 में ये शिविर अद्वैत आश्रम-मायावती (उत्तराखण्ड), चिन्मय गार्डन-कोयम्बटूर (तमिलनाडु), शारदा तपोवन-टिहरी (उत्तराखण्ड), चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन-वेलियानाड (केरल), आदि शंकर ब्रह्म विद्यापीठ-उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड), आर्ष विद्या मंदिर-राजकोट (गुजरात), दयानन्द आश्रम-ऋषिकेश एवं चिन्मय तपोवन-सिद्धबारी (हिमाचल प्रदेश) में आयोजित हो रहे हैं। शिविरों में आचार्य शंकर के प्रकरण ग्रंथ जैसे— तत्त्वबोध, आत्मबोध, भज गोविन्दम्, विवेक चूडामणि और मनीषा पंचकम् आदि के अध्ययन के साथ-साथ प्रतिदिन योगाभ्यास, ध्यान, स्तोत्र पारायण और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए जाते हैं। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को किसी एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थल का भ्रमण भी कराया जाता है। सात्त्विक दिनचर्या का पालन करते हुए देश-विदेश के प्रतिभागी यहां दशनामी संन्यास परंपरा के ‘गुरुकुल’ का साक्षात् अनुभव कर रहे हैं।
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