अपराध

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सहकारी बैंक अधिकारियों सहित चार को 3-3 साल का कारावास, पद का दुरुपयोग कर किया था भ्रष्टाचार, न्यायालय ने पाया दोषी

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भोपाल। लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करने वाले तीन बैंक अधिकारियों और एक ग्राहक को भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीन-तीन साल के सश्रम कारावास एवं दो अलग-अलग धाराओं में एक-एक हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। 

विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मनोज कुमार सिंह के न्यायालय ने जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के अधिकारियों जिनमें विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा,  विनोद कुमाद देवल प्रबधंक सहकारिता निरीक्षक ए पी एस कुशवाह और क्रेता परमजीत बैदी को धारा 420, धारा 120-बी भादवि 13-1(डी), 13(2) पीसी एक्ट के तहत दर्ज प्रकरण में सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को धारा 420, धारा 120-बी भादवि में 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक-एक हजार रुपये के अर्थदण्ड  तथा ग्राहक को छोडक़र शेष तीनों अधिकारियों को धारा 13-1(डी) सहपठित 13(2) पीसी एक्ट में  3-3 वर्ष के सश्रम कारावास तथा एक-एक हजार रुपये के अर्थदण्ड-से दण्डित किया है। इस प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती हेमलता कुशवाहा ने पैरवी की। 

आरोपियोंने इस तरह की गड़बड़ी 

ग्राम पडरिया जार तहसील हुजूर जिला भोपाल के किसान हरिसिंह ने अपनी कृषि भूमि को बैंक में बंधक रख 18 हजार रुपये का ऋण पंप और थे्रसर के लिए लिया था। आरोपियों ने किसान की की 5 एकड़ भूमि 16 फरवरी 2002 को मात्र 40 हजार रुपये में परमजीत बैदी को नीलामी प्रक्रिया का उल्लघंन कर कृषि भूमि बाजार मूल्य एवं कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य से अत्याधिक कम कीमत पर अवैधानिक रूप से नियम विरुद्ध नीलामी कर दिया। इसके लिए आरोपियों ने धोखाधाड़ी ओर पद का दुरुपयोग कर नीलामी से संबंधित नोटशीट के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। आरोपियों ने पुष्टि हेतु इसे संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थााएं भोपाल को भेजा, जहां उनके द्वारा अवैधानिक रूप से नीलामी की पुष्टि आदेश पारित किया। आरोपियों ने योजना बनाकर इस भूमि को नीलामी के माध्यम से परमजीत बैदी को बिकवाया। लिखित सूचना के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने जांच कप अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया था।