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आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों को नहीं कह सकेंगे फर्जी-झोलाछाप, भारतीय चिकित्सा पद्दति राष्ट्रीय आयोग ने जारी किया परिपत्र

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भोपाल। आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा व सोवा- रिग्पा चिकित्सकों को झोलाछाप अथवा फर्जी डॉक्टर नहीं बोला जा सकता। भारतीय चिकित्सा पद्दति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) नई दिल्ली के आचार संहिता एवं पंजीयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कन्नौजिया ने परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि इन पैथियों के पंजीकृत चिकित्सक विधिवत स्नातक डिग्री कर प्रशिक्षित होते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय चिकित्सा राष्ट्रीय परिषद अधिनियम 1970 ( आईएमसीसी एक्ट 1970) तथा एनसीआईएसएम एक्ट 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत पंजीकृत मान्यता प्राप्त चिकित्सा व्यवसायी हैं। अगर इन्हें झोलाछाप या फर्जी डॉक्टर कहा जाता है तो यह विधि विरुद्ध है। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की इकाई मध्यप्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन ने कई बार एनसीआईएसएम व आयुष मंत्रालय को इस संबंध में शिकायत की है। संगठन के प्रांताध्यक्ष डॉ विनोद बैरागी ने कहा कि संगठन के प्रयासों से ही यह संभव हो सका है। अब सम्मान के साथ आयुष चिकित्सक चिकित्सकीय कार्य कर सकेंगे। 

मीडिया भी बता रही झोलाछाप और फर्जी 

परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस), बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (बीयूएमएस), बैचलर ऑफ सिद्ध मेडिसिन एण्ड सर्जरी (बीएसएमएस) तथा बैचलर ऑफ सोवा-रिग्पा मेडिसिन (बीएसआरएमएस) जैसी मान्यता प्राप्त उपाधियां प्राप्त, विधिवत प्रशिक्षित एवं पंजीकृत चिकित्सको को सार्वजनिक सूचनाओं, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा सोशल मीडिया मंचों व सार्वजनिक माध्यमों में ‘झोलाछाप’ अथवा ‘फर्जी डॉक्टर’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंच रही है। किसी भी व्यक्ति, संस्था, मीडिया संगठन अथवा प्राधिकरण द्वारा ऐसे शब्दों का सार्वजनिक रूप से प्रयोग किया जाना, एनसीआईएसएम अधिनियम 2020 के अंतर्गत प्रदत्त विधिक मान्यता के विपरीत होगा तथा संबंधित चिकित्सकों के व्यवसायिक एवं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। 

‘मप्र में यूनानी के 43 महाविद्यालय सहित देशभर में एएसयूएस के 750 से ज्यादा महाविद्यालय संचालित हैं। देशभर के आठ लाख से ज्यादा पंजीकृत आयुष डॉक्टर इस परिपत्र के बाद सम्मान के साथ चिकित्सा कार्य कर सकेंगे।’

डॉ राकेश पाण्डेय

सदस्य- मप्र आयुर्वेद सम्मेलन