मध्यप्रदेश

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शेख को संतुष्ट करने नेहरू ने लिया था खतरनाक निर्णय

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राज्य स्तरीय ‘एक देश-एक विधान’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, बोले 

भोपाल। भारत विभाजन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को संतुष्ट करने के लिए उनके कहने पर प्रसिडेंसियल आदेश के माध्यम से धारा 34 ‘ए’ जोडक़र देश और समाज को तोडऩे का निर्णय लिया। धारा 370 और 35 ‘ए’ के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकार छीने गए। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद संविधान संशोधन कर जम्मू-कश्मीर को इन दोनों धाराओं के बंधन से मुक्त किया। अब जम्मू-कश्मीर सहित पूरा देश हर जाति-धर्म का नागरिक पाकिस्तान की किसी भी हरकत का एक साथ विरोध करता है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को रविन्द्र भवन में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘एक देश-एक विधान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। 

जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करतेह हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजादी के बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में धारा 370 लगाने का विरोध किया था। उन्होंने दिल्ली में लिखकत अली खान और जवाहर लाल नेहरू के बीच बंद कमरे में हुए ‘लियाकत समझौता’ को नहीं माना। उन्होंने देश की भावी परस्थिति को पहले ही समझ लिया था। इस मामले में पहली शहादत डॉ. मुखर्जी की हुई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस पार्टी के नेता ने सबसे पहले धारा 370 का विरोध किया। उसे हटाने का माद्दा भी उसी पार्टी ने दिखाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे हटाकर दिखा दिया। 

डॉ. मुखर्जी ने दिखाई देश को दृष्टि 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, 51 साल की उम्र में डॉ. मुखर्जी ने भावी पीढ़ी के भविष्य और लोकतंत्र के लिए शहादत दी । आजादी के लिए देश ने एक हजार साल तक बलिदान दिए। पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप के समय से आजादी तक कई महापुरुष आजादी के लिए लड़े। आजादी के बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश को दृष्टि दी। 

संविधान की किताब दिखाकर किया जा रहा गुमराह

डॉ. यादव ने कहा कि जो पीढिय़ां बुजुर्गों को भूलती हैं, उनका भविष्य अच्छा नहीं होता। देश का भविष्य सुरक्षित रखने वाले महापुरुषों को याद रखना पड़ेगा। डॉ. अम्बेडकर ने भी जम्मू-कश्मीर में धारा 370 लगाए जाने का विरोध किया था। लेकिन आजकल कुछ लोग संविधान की किताब दिखाकर गुमराह कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी याद रखना पड़ेगा। भारत के गौरवशाली अतीत को हमें याद रखने की आवश्यकता है। 

राष्ट्रहित में डॉ. मुखर्जी का योगदान ऐतिहासिक: पाण्डे

कार्यक्रम कें मुख्य वक्ता राजीव कुमार पांडे ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का कश्मीर के मुद्दे पर जो योगदान है उसके बारे में अक्सर चर्चा होती है। लेकन उनका दूसरा योगदान भी इतना ही बड़ा है, जिस पर कम चर्चा होती है। आज कोलकाता और पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा है। पूर्वोत्तर के गलियारे से क्षेत्र के सभी राज्य परस्पर जुड़े हैं। इस क्षेत्र के अस्तित्व को बनाए रखने से पाकिस्तान का भूमि संपर्क नहीं हो सका। डॉ. मुखर्जी ने इन प्राथमिकताओं और राष्ट्र हित से जुड़े अति-महत्वपूर्ण विषय को समय रहते समझा और आवश्यक संघर्ष किया। इस तरह डॉ. मुखर्जी का योगदान ऐतिहासिक है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ मंच पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, मंत्री प्रहलाद पटेल, धर्मेन्द्र लोधी, विश्वास सारंग, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, ननि अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भाजपा जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।