Breaking News:

• रेखा यादव ने संभाला महिला आयोग अध्यक्ष का कार्यभार • ‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में कलेक्टर के निर्देश • पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष ने मिठाई के साथ खिलाई झालमुड़ी • कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार • मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व दिन • रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की चक्रानुक्रम (रोटेशन) सूची! अभी मैदानी अमले को मिलना शुरू हुई नई पदस्थापना
राजधानी

Image Alt Text

विश्वविद्यालयों में स्थानीय रोजगार के अनुरूप तैयार हों पाठ्यक्रम: राज्यपाल

राजधानी

‘रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर’ राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री 

भोपाल। रोजगार आधारित शिक्षा-रूझान एवं नए अवसर जैसे विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला समय की आवश्यकता है। भविष्य की तैयारी का सशक्त मंच है। रोजगार केन्द्रित शिक्षा और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश के योगदान को बढ़ाने ने की प्रभावी पहल है। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को रोजगार के अवसरों तक सुलभ पहुंच देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाए। विश्वविद्यालयों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को पहचान कर पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। यह बात राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘विकसित भारतञ्च2047 अंतर्गत ‘रोजगार आधारित शिक्षा: रुझान एवं नए अवसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। 


कौशल भारत की करंसी, नवाचार के साथ बढ़ रहे आगे: मुख्यमंत्री 

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज करेंसी का जमाना है, लेकिन स्किल (कौशल) ही करेंसी है, भारत इसे अच्छी तरह समझता है। इसीलिए हम नवाचार करते हुए कौशल विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मप्र एक कृषि प्रधान और तेजी से बढ़ता राज्य है। इसीलिए हम खेती की पढ़ाई को सामान्य महाविद्यालयों तक लेकर गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, शिक्षा केवल कागज की डिग्री लेने के लिए न हो, बल्कि वह भविष्य की चुनौतियों से लडऩे और उसे समझने में समर्थ हो। इसीलिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्युटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।

सभी कॉलेजों में शुरू करेंगे पशु-चिकित्सा शिक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा, दूध उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। अब हम इसमें पहले स्थान पर आने के लिए प्रयासरत हैं। हमारे पास 6 करोड़ से अधिक पशुधन है। इसके लिए हमें ज्यादा पशु चिकित्सकों की जरूरत है। यह जरूरत सिर्फ एक कॉलेज से पूरी नहीं हो सकती है। इसलिए, प्रदेश के सभी कॉलेजों में पशु चिकित्सा से जुड़ी शिक्षा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अपने सभी विश्वविद्यालय में कुलपति का नाम बदलकर कुलगुरु कर दिया, दूसरे राज्यों में भी इसे स्वीकार्यता मिल रही है। 

संस्कारों के साथ मिले रोजगारपरक शिक्षा: परमार 

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा हर काल में सर्वोच्च रही है। भारतीय संस्कृति में संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए रोजगार देने की परंपरा थी। बिना संस्कारों के हम श्रेष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक नहीं बना सकते हैं। प्रदेश में नई शिक्षा नीति और कार्य की जवाबदेही तय करने की पहल देश भर में स्थान बनाएगी और प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्य वक्ता डॉ. एसी पांडे (निदेशक, आईयूएसी नई दिल्ली) ने तकनीकी बदलावों और नवाचारों से पैदा हो रहे रोजगार के नए आयामों पर विस्तृत विचार साझा किए। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष भरत शरण सिंह सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, प्राचार्य, प्रबुद्धजन, शिक्षाविद और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित रहे। 

चार तकनीकी सत्रों में हुई कार्यशाला 

प्रथम सत्र: अभियांत्रिकी और तकनीकी

द्वितीय सत्र: प्राकृतिक और जीवन विज्ञान

तृतीय सत्र:कौशल विकास और रोजगार अवसर

चतुर्थ सत्र: सामाजिक विज्ञान और प्रबंधन