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मध्यप्रदेश
13 विभागों के 23 अधिनियमों में 45 सत्रों में संशोधन की तैयारी
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विधानसभा के मानसून सत्र में आ सकता है जन विश्वास विधेयक-2.0
भोपाल। 28 जुलाई से 8 अगस्त के बीच आयोजित होने जा रहे मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार मप्र जन विश्वास विधेयक-2.0 लाने की तैयारी में है।संसदीय कार्य विभाग द्वारा विधानसभा सचिवालय को दिए गए एजेंडे में इसे शामिल किया गया है। इस संशोधन विधेक के माध्यम से सरकार 13 विभागों के 23 अधिनियमों के 45 प्रावधानों में संशोधन कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरकार मप्र जन विश्वास विधेयक 1.0 सदन में लाई थी, जिसमें पांच विभागों के आठ अधिनियमों के 64 प्रावधानों में संशोधन किया था। केंद्र सरकार के बाद, मध्य प्रदेश इस विधेयक को लाने वाला पहला राज्य है। प्रस्तावित जन विश्वास विधेयक 2.0 के माध्यम से सरकार शासकीय प्रक्रिया को सरल बनाने और छोटी-मोटी गलतियों पर कारावास जैसी सजा के प्रावधान को समाप्त करना चाहती है। यह विधेयक सरकार की ‘कारोबार में आसानी’ नीति के तहत लाया जा रहा है।
खसरा रोधी टीका की अनिवार्यता होगी समाप्त
जानकारी के अनुसार मप्र जन विश्वास विधेयक 2.0 में संशोधन के माध्यम से सरकार खसरा रोधी टीकाकरण अधिनियम 1968 को समाप्त कर सकती है। इस अधिनियम के अनुसार, खसरा रोधी टीका लगवाना अनिवार्य था। गृह विभाग के एनाटॉमी अधिनियम में भी संशोधन किया जा जा सकता है। इसके अलावा नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 208 और नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 195 में संशोधन किया जाएगा। मोटरयान कराधान नियम (मोटर वाहन कराधान नियम) के अंतर्गत अर्थदंड तक की सजा का प्रावधान किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद सदन में होगा पेश
मप्र ‘जन विश्वास-2.0’ विधेयक को सदन में पेश करने से पहले इसे मंत्रि-परिषद से पास कराया जाएगा। आगामी मंत्रि-परिषद की बैठक में इसका प्रस्ताव आ सकता है। मंत्रि-परिषद से मंजूरी मिलने के बाद मानसून सत्र में इसे विधानसभा में पेश किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि विगत 18 जुलाई को इस विधेयक के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधेयक में शामिल विभिन्न विभागों के प्रावधानों पर चर्चा की गई। मंत्रि-परिषद की बैठक के लिए विधेयक का प्रारूप को तैयार करने से पहले प्रमुख सचिव स्तर पर एक और बैठक हो सकती है।
अनुपूरक बजट भी होगा पेश
मानसून सत्र में सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। सरकार ने तय किया है कि बजट में केवल जनहित से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, अनावश्यक खर्चों पर सख्ती बरती जाएगी। वित्त विभाग ने सभी विभागों से साफ कह दिया है कि अफसरों के लिए वाहन जैसी फिजूलखर्ची संबंधी प्रस्ताव न भेजें। इस सप्लीमेंट्री बजट में जनता से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं रुकें नहीं और प्रदेश के हित में प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
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