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राजधानी

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पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर असमंजस में विभाग

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-न न्यायालय का स्थगन आदेश मिला, न जीएडी से कोई निर्देश
भोपाल। प्रदेश सरकार ने 9 साल से बंद पदोन्नति प्रक्रिया को जिस तेजी के साथ शुरू किया था। उच्च न्यायालय में ‘पदोन्नति नियम 2025’ के खिलाफ याचिकाएं लगने के बाद पदोन्नति की प्रक्रिया उसी तेजी के साथ ठप पड़ गई हैं। पदोन्नति नियम पर उच्च न्यायालय से रोक लगने के बाद विभागों को न तो न्यायालय का कोई स्थगन आदेश मिला है और न ही सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में विभाग पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग ने 31 जुलाई तक पदोन्नति की प्रक्रिया को पूरी करने के निर्देश दिए थे।
राज्य शासन ने पिछले महीने 19 जून को पदोन्नति नियम 2025 को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद सभी विभागों को निर्देश जारी एि गए थे कि 31 जुलाई तक पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। कुछ विभाग और निगमों में पदोन्नति नियम 2025 के तहत कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों को पदोन्नत करते हुए आदेश भी जारी कर दिए थे। इस बीच जुलाई महीने के शुरुआत में ही ऊर्जा विभाग एवं पशुपालन पालन विभाग के कर्मचारियों ने पदोन्नति नियम 2025 के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिस पर न्यायालय ने 7 जुलाई को सुनवाई करते हुए सरकार से पदोन्नति नियम 2002 और पदोन्नति नियम 2025 के बीच भिन्नता के बारे में पूछा। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस वजह से न्यायालय ने 15 जुलाई की सुनवाई में दोनों नियमों में भिन्नता से जुड़े तथ्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही पदोन्नति नियम के तहत पदोन्नति पर भी रोक लगा दी थी। 15 जुलाई को उच्च न्यायालय में सुनवाई टल गई। अभी तक पदोन्नति नियम पर सुनवाई की तिथि तय नहीं हो पाई है। हालांकि इस बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को पदोन्नति के संबंध में कोई भी निर्देश नहीं दिए हैं। ऐसे में विभाग प्रमुख इस बात को लेकर पशोपेश में हैं कि पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। क्योंकि शासन के निर्देशानुसार पदोन्नति प्रक्रिया की तिथि 31 जुलाई निर्धारित है।
कर्मचारी संगठनों में सन्नाटा
पदोन्नति का मामला पहले से ही न्यायालय में 9 साल से लंबित था। सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था के परिपालन में सरकार ने पदोन्नति का रास्ता निकाला। लेकिन पदोन्नति में आरक्षण देने की वजह से एक बार फिर मामला न्यायालय में पहुंच गया है। हालांकि नए नियमों पर न्यायालयीन रोक के बीच पदोन्नति मामले में कर्मचारी संगठनों में भी सन्नाटा है। किसी भी संगठन ने इस मामले में चुप्पी नहीं तोड़ी है। एक कर्मचारी संगठन के नेता ने बताया (नाम नहीं छापने की शर्त पर) कि नए नियम को न्यायालय में अटकाना भी एक प्रशासनिक अधिकारियों की रणनीति हो सकती है।
सरकार कर चुकी है जवाब देने की तैयारी
हाईकोर्ट ने सरकार से पदोन्नति नियम 2002 और पदोन्नति नियम 2025 के बीच भिन्नता से जुड़ी जानकारी मांगी थी। इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक में पदोन्नति से जुड़े दोनों नियमों की भिन्नता पर चर्चा हो चुकी है। सरकार उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए जवाब भी तैयार कर चुकी है। अगली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से इसे रखा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों ने बताया कि पदोन्नति से जुड़े मामले को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने रखा जाएगा।