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मध्यप्रदेश

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ग्राहक पंचायत ने फार्मेसी काऊंसिल में जताई आपत्ति

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जनहित के विपरीत है दवा बिक्री में रियायत के प्रचार-प्रसार पर रोक  

-सार्वजनिक सूचना निरस्त नहीं करने पर दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी 

भोपाल। मप्र फार्मेसी काऊंसिल द्वारा दवा खरीदी में ग्राहकों को दी जाने वाली रियायत संबंधी प्रचार-प्रसार पर लगाई गई रोक का विरोध शुरू हो गया है। इसे जनहित के विपरीत बताते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने फार्मेसी काऊंसिल से आपत्ति जताई है। साथ ही इस संबंध में जारी सार्वजनिक सूचना निरस्त नहीं करने पर कानूनी की कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। 

   संगठन के विधि आयाम प्रमुख अश्वनी शर्मा ने अध्यक्ष फार्मेसी काऊसिंल को लिखे पत्र में 25 जुलाई 2025 को जारी सार्वजनिक सूचना एमपीपीसी/2025/345 को उपभोक्ताओं और आम जनता के हितों के विपरीत बताते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 4 का उद्देश्य बाजार में दुरुपयोग रोकना है, न कि उपभोक्ताओं को मिलने वाले सस्ते विकल्प खत्म करना। यह निर्देश छोटे दुकानदारों को भी प्रभावित करेगा और दवाइयाँ महँगी होंगी। वहीं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार उपभोक्ताओं को मूल्य प्रतिस्पर्धा, छूट और रियायतों का लाभ लेने का अधिकार है। मेडिकल स्टोर्स द्वारा दिए गए डिस्काउंट से मरीजों को सस्ती दवाइयों उपलब्ध होती हैं, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होता है। बावजूद इसके दवा क्षेत्र में छूट और प्रतिस्पर्धा रोककर जनहित और उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत निर्णय लिया जा रहा है। जिसको निरस्त करना जरूरी है।