विशेष

Image Alt Text

अरुणाचल प्रदेश से जारी एनओसी, मप्र में दौड़ रहे सैंकड़ों वाहन

विशेष


मप्र के परिवहन अधिकारियों ने चोरी के वाहनों का किया पंजीयन
कैग की आपत्ति के बाद परिवहन आयुक्त ने दिए संदिग्ध वाहनों की विशेष जांच के निर्देश

भोपाल। मप्र का परिवहन विभाग सिर्फ हाईवे एवं कार्यालयों में अवैध वसूली को लेकर ही बदनाम नहीं है। प्रधान महालेखाकर की रिपोर्ट से मप्र के परिवहन कार्यालयों में बाहरी राज्यों के संदिग्ध (चोरी) वाहनों को नियमों  दरकिनार कर पंजीकृत करने का खुलासा हो गया है। प्रधान महालेखाकार राम हित ने परिवहन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर संदिग्ध वाहनों पंजीयन के मामले में सत्यापन रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने सभी क्षेत्रीय एवं जिला परिवहन अधिकारियों को पत्र लिखकर अरुणाचल प्रदेश की एनओसी के आधार पर मप्र मेंं पंजीकृत किए गए वाहनों की जांच के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही दूसरे राज्यों के वाहनों के पंजीयन में सावधानी बरतने को कहा है।
वाहन पोर्टल के अनुसार प्रदेश में 33357 वाहनों दूसरे राज्यों की एनओसी पर मप्र में पंजीकृत किए गए हैं। पिछले दो सालों में अरुणाचल प्रदेश के परिवहन कार्यालय से 1008 वाहनों की एनओसी मप्र के लिए जारी की गई। इनमें से 179 वाहनों का मप्र में पुन-पंजीयन हुआ ही नहीं है। खास बात यह है कि इनमें से 150 वाहनों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। अरुणाचल प्रदेश ने जिन वाहनों की मप्र के लिए एनओसी जारी की। इनमें से 29 वाहन गुजरात (8), आंध्रप्रदेश (5), राजस्थान (5), दिल्ली(5), नागालेंड(2), उप(2)्र, पश्चिम बंगाल (1) और छत्तीसगढ़(1) में पंजीकृत किग गए। इन राज्यों ने वाहनों के पंजीयन में नियमों की अनदेखी की। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे राज्यों के वाहनों का पंजीयन बिना भौतिक सत्यापन के किया गया। ज्यादातर वाहनों की एनओसी जारी करने में जिन मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया वे फर्जी पाए गए। 656 वाहनों की एनओसी में सिर्फ 3 मोबाइल नंबर दर्ज है।
एनसीआरबी की बिना सहमति के पंजीकृत किए वाहन
महालेखाकार के अनुसार वर्ष 2023-24 में अरुणाचल प्रदेश से 402 वाहनों की मप्र के लिए एनओसी जारी की गई थी। इनमेें से 331 वाहन लक्षदीप में पंजीकृत थे। इन 331 वाहनों में से 296 वाहन मप्र के विभिन्न परिवहन कार्यालयों (उज्जैन 126 वाहन, देवास 42, इंदौर 20, नीमच 19, ग्वालियर 19, खरगोन 11, जबलपुर 10, सिंगरौली 10 और भोपाल में 7 वाहन) में पंजीकृत किए गए। इन 296 वाहनों में से 288 वाहनों का एनसीआरबी नंबर नहीं मिला। इसी तरह 2024-25 में अरुणाचल प्रदेश से 606 वाहनों की मप्र के लिए एनओसी जारी की गई थी। इनमें से 545 वाहन लक्षदीप में पंजीकृत थे। इनमें से 460 वाहन मप्र (उज्जैन 166, आगर-मालवा 69, इंदौर 57, देवास 30, नीमच 27, जबलपुर 23, झाबुआ 14, खरगोन 11 वाहन) में पुन-पंजीकृत किए गए। इनमें से 366 वाहनों का एनसीआरबी पर रिकॉर्ड नहीं मिला। मप्र के परिवहन अधिकारियों ने दूसरे राज्यों के 662 वाहनों का पुन: पंजीयन करते समय एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो) की सहमति नहीं ली गई।
परिवहन अधिकारियों में मचा हडक़ंप
महालेखाकार के पत्र को गंभीरता से लेते हुए परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने सभी सभी क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। जबकि महालेखाकार ने दूसरे राज्यों के वाहनों के पंजीयन में बरती गई लापरवाही को गंभीर माना है। ऐसे मामले में परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना चाहिए। हालंाकि परिवहन विभाग ने किसी भी परिवहन अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदारी नहीं माना है।