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मध्यप्रदेश
हाजिर हों राजस्व और विधि विभाग के प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश
- सरकारी जमीनों की हेराफेरी मामले में उच्च न्यायालय सरकार के रवैए पर उठाए सवाल
ग्वालियर। प्रदेश में सरकारी जमीनों के खुर्द-बुर्द मामले में मप्र उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए विधि एवं राजस्व विभाग के प्रमुख सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा है। ग्वालियर में सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम किए जाने के मामले में सुनवाई 11 अगस्त को होना है।
मामला दीपक कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्राम मुरार के सर्वे क्रमांक 703, 705, 706, 707, 708 की कुल 4 बीघा 1 बिस्वा सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर रामचरण, गीता, पूरन आदि ने अपने नाम नामांतरण करा लिया है। याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण मामले मेें दोनों प्रमुख सचिवों को पहले 6 अगस्त को न्यायालय के सामने वर्चुअल उपस्थित होना था, लेकिन विधानसभा सत्र में व्यस्तथा के चलते 11 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा।
प्रमुख सचिव का पत्र न्यायालय ने किया अस्वीकार
प्रमुख सचिव राजस्व ने शपथ पत्र पेश किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने श्योपुर कलेक्टर के 7 फरवरी 2024 के पत्र को आंखें खोलने वाला बताया, जिसमें आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए हुए फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया था। उच्च न्यायालय ने 9 अप्रैल 2025 को इस मामले पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया था कि सरकारी जमीनों को बचाने में सरकार का प्रदर्शन चिंताजनक क्यों है? न्यायालय ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को जमीनों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों के बारे में बताने का आदेश दिया था।
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