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प्रकृति के तालमेल से ही होगा सच्चा विकास: मुख्यमंत्री
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अभियंताओं ने सीखे विकास के साथ ‘पर्यावरण से समन्वय’ के सूत्र
भोपाल। पर्यावरण और विकास विरोधी नहीं, बल्कि सूर्य और चंद्र की तरह हैं। अलग भूमिकाओं में रहते हुए भी समन्वय बनाकर ये एक-दूसरे को पूरक बनाते हैं। निर्माण में प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना ही सच्चा समन्वय और विकास है। भोपाल का बड़ा तालाब इस बात का प्रमाण है कि बिना नदी की धारा रोके भी जल संग्रहण संभव है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रविन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग द्वारा विभागीय अभियंताओं के लिए ‘पर्यावरण से समन्वय’ संगोष्ठी-सह प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगल और सडक़ दोनों सुरक्षित रखने के लिए पुल के नीचे वन्यजीवों के आवागमन का मार्ग बनाया गया। सरकारी धन का उपयोग हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन उससे भी बड़ी जिम्मेदारी हमारी आत्मा की है जिसका जवाब हमें परमात्मा को देना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लीक से हटकर सोचने और काम करने की जरूरत है। कार्यशाला में हुए मंथन से सुझाव निकलकर सामने आएंगे, उन पर सरकार विचार करेगी और लागू भी करेगी। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान समूहिक राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद विभाग ने अधोसंरचना और विकास कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया। कार्यशाला में प्रदेश के सभी संभागों से करीब एक हजार से अधिक अभियंता शामिल हुए।
तीन सरकारी रिफायनरी से ही खरीदेंगे बिटुमिन: मंत्री
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि हमारे इंजीनियर्स को उन राज्यों में भेजा गया, जिन्हें तकनीकी रूप से हमसे अच्छा माना जाता था। इसी टीम के एक चीफ इंजीनियर ने रिपोर्ट में बताया कि तेलंगाना में सात साल पुरानी सडक़ ऐसी है जैसे छह माह पहले बनी हो। मप्र में ऐसी सडक़ क्यों नहीं बन रही हैं, इसकी वजह तलाशने पर पता चला कि हमारा बिटुमिन उस स्तर का नहीं है जैसे कि तेलंगाना में उपयोग में लाया जाता है। इसलिए तय किया है कि बिटुमिन केवल तीन सरकारी रिफायनरी से ही खरीदा जाएगा। लोकपथ एप में आने वाली शिकायतों के समाधान के लिए अब सात दिन के बजाय चार दिन का समय तय किया गया है।
गति शक्ति ने डेटा जोडक़र खत्म किया साइलो: टीपी सिंह
भास्कराचार्य संस्थान के महानिदेशक टीपी सिंह ने कहा कि गति शक्ति ने सबके डेटा को जोडक़र साइलो का काम खत्म किया है। किसी तरह की प्लानिंग में जिस तरह के डेटा की जरूरत होती है, वह अब इसके माध्यम से साल्व हो गई है। मध्यप्रदेश सरकार किसी भी तरह के डेटा भास्कराचार्य संस्थान को उपलब्ध कराए तो उसका साफ्टवेयर बनाकर दे देंगे। जो टेक्नालॉजी चाहिए वह उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने कहा, सरकारी विभाग की जमीन के लिए सरकार की परमिशन लेना होती है। भास्कराचार्य संस्थान ने ऐसे साफ्टवेयर तैयार किए हैं कि एनओसी और अप्रूवल आसान हुए हैं। निर्माण कार्योंमें सही अलाइनमेंट हो, पारदर्शिता हो, पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है। इंजीनियर कार्यशाला में मुझसे ऐसे सवाल पूछें, जिसका जवाब मैं न दे सकूं। उसी सवाल का जवाब तलाशा जाएगा। इसलिए इंजीनियर ऐसे सवाल पूछें जिसके जवाब न मिल पा रहे हों।
तीन स्तरीय प्रयासों से लाना होगा परिवर्तन: आर्य
पर्यावरणविद् गोपाल आर्य ने प्रशिक्षण सत्र में अभियंताओं को दो ताली के साथ पेड़ लगाएंगे, पानी बचाएंगे, पॉलीथीन हटाएंगे और जयहिंद का मंत्र समझाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाना हैतो ये तीन काम करने होंगे। उन्होंने कहा कि पूरी सृष्टि में जल, जमीन, जंगल, जानवार, जन हैं। इंसान कुल 0.1 प्रतिशत और 99.99 प्रतिशत तो पूरी सृष्टि है। पूरी सृष्टि को 0.1 प्रतिशत इंसान साफ कर रहा है। जब प्रशासन, शासन समाज और संस्थाएं एक साथ इक_ा होकर प्रयास में जुट जाते हैं। समाज में परिवर्तन शुरु हो जाता हैे। उन्होंने बताया कि हमें तीन स्तर पर काम करना है। पर्सनल, प्रोफेशनल और पब्लिकल। नागरिक होने के नाते मेरा क्या कर्तव्य है। प्रोफेशनली स्तर पर मैं इंजीनियर हँू, इस नाते से क्या कर सकता हँू। और पब्लिक स्तर पर मुझे क्या करना है। इंजीनियर होने के नाते से हम कार्यालय भवन के पानी का हार्वेस्टिंग कर लाखों लीटर पानी जमीन में डाल सकते हैं। कार्यालय में पेपर के स्थान पर रीसाइकिल पेपर उपयोग कर पेड़, कार्बन, पानी और पर्यावरण बचा सकता हँू। कार्यालय में प्लास्टिक, पॉलीथीन, डिस्पोजल के उपयोग को रोकने का प्रयास कर सकता हँू।
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