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शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं प्रदेश के मेडिकल कॉलेज

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-करीब 6 हजार पद 17 मेडिकल कॉलेजों में खाली
भोपाल। प्रदेश के 17 मेडिकल कालेज अमले की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इनमें करीब 6 हजार पद खाली है। सबसे ज्यादा कमी शैक्षणिक और नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों के मामले में सामने आई है। जबकि इन कॉलेजों में 2750 विद्यार्थियों ने सिर्फ एमबीबीएस के लिये प्रवेश लिया है।
        विधानसभा को दी गई जानकारी मेंं चिकित्सा शिक्षा विभाग के इन  आंकड़ों ने चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। मजेदार बात यह है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के जिम्मेदार व उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले का चिकित्सा महाविद्यालय भी मानससंसाधन की कमी से जूझ रहा है।   जहां चिकित्सक बनने के लिये पहुंचे विद्यार्थियों को शिक्षण के लिये विशेषज्ञ प्रो. नहीं मिल रहे हैं। वहीं मरीजों की देखभाल के लिये जरूरत मुताबिक नर्सिंग स्टॉफ भी नहीं है। जबकि नर्सिंग संवर्ग में ही 2455 पद खाली है। शैक्षणिक संवर्ग में यह कमी 1224 से अधिक नहीं है।
सतना-रीवा में अमले की भारी कमी
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सतना-रीवा में भारी कमी सामने आई है। सतना मेें 861 और चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में स्वीकृत पदों के मुकाबले 522 कर्मचारी कम है। जबकि सागर मेडिकल कॉलेज में यह संख्या 584 पर सिमट गई है।

6 मेडिकल कॉलेजों में नर्सों की कमी
प्रदेश के 17 मेडिकल कॉलेजों में 6 नर्सिंग स्टॉप की भारी कमी से जूझ रहे हैं। औसतन प्रत्येक कॉलेज में यह कमी 200 की बनी हुई है। इसमें भोपाल का गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भी है। यहां पर 173, इंदौर 465, सागर 182, छिंदवाड़ा 203 और सतना में 526 पद खाली हैं।