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विशेष

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1045 करोड़ की वसूली से वंचित हुआ खनिज विभाग

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अवैध खनन करता रहा माफिया, न राजस्व मिला न अर्थदण्ड 
भोपाल। चार साल पहले खनिज रियायरत शुल्क, किराया और रॉयल्टी बढ़ाकर एक साल में 35 प्रतिशत से अधिक  राजस्व वृद्धि के आंकड़े दिखाकर वाहवाही लूटने वाला खनिज विभाग अधिकारियों की लापरवाही और खनिज माफिया को संरक्षण के चलते 1045 करोड़ से अधिक राजस्व से वंचित रहा। विभागीय अधिकारियों ने अवैध और अनुमति से अधिक खनन करने वाले माफिया से न तो राजस्व ही वसूला और न ही नियमानुसार अर्थदण्ड अधिरोपित कर वसूली की जा सकी।
भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2021-22 की रिपोर्ट बताती है कि 25 जिला खनिज कार्यालयों और कार्यालय संचालक, भौमिकी खनिकर्म के राजस्व संबंधी दस्तावेजों की लेखापरीक्षा में 2829 प्रकरणों में 1045.31 करोड़ रुपये राजस्व की वसूली नहीं हो सकी अथवा कम वसूली हुई।
55 पट्टाधारकों से नहीं वसूले 711.08 करोड़
11 जिला खनिज कार्यालयों, बैतूल, भोपाल, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, जबलपुर, खरगोन, सागर, सीहोर, शिवपुरी, सीधी और सिंगरौली में वर्ष 2022 के अप्रैल से सितम्बर में 45 खनन पट्टाधारकों ने खनन योजनाओं या ईसी में निर्धारित सीमा से अधिक 7,16,642 घनमीटर गिट्टी, 1,23,348 घनमीटर मुरम, 13,625 घनमीटर मार्बल, 2,90,289 घनमीटर रेत और 1,34,775 मीट्रिक टन डोलोमाइट का उत्खनन किया। खनिज अधिकारी इनसे उत्खनित खनिजों की राशि नहीं वसूल सके। अधिकारियों ने इन पट्टेदारों को न तो स्वीकृत सीमाओं के भीतर अपने खनन को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया, न ही उनके विरुद्ध स्वयं कार्रवाई की और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस उल्लंघन की सूचना दी। बल्कि खनिज अधिकारी पर्यावरण अनुमति मिलने से पहले ही पट्टेदारों को परिवहन अनुमति (टीपी) जारी करते रहे। इससे शासन को 630.06 करोड़ का नुकसान हुआ।
7.85 करोड़ की गिट्टी-फ्लैगस्टोन का अवैध उत्खनन
छिंदवाड़ा, सागर और सीहोर जिलों में 10 खनन पट्टाधारकों के पास अनुमोदित खनन योजनाएं नहीं थीं। अप्रैल 2019 से मार्च 2022 के बीच इन्होंने 1,77,811 घनमीटर गिट्टी और 1520 घन मीटर फ्लैगस्टोन उत्खनन किया। जिसका बाजार मूल्य 7.85 करोड़ था। अधिकारियों ने नियमानुसार पट्टाधारकों से खनिज लागत का 10 गुना बाजार मूल्य/20 गुना रॉयल्टी नहीं वसूली।
अधिकारियों ने कम वसूली डीएमएफ की राशि
छतरपुर, छिंदवाड़ा और रतलाम जिलों में जनवरी 2021 से मार्च 2022 के बीच गौण खनिजों के परिवहन के लिए 220.24 करोड़ की रॉयल्टी मिली। जिस पर 22.02 करोड़ डीएमएफ अंशदान देय था। लेकिन अधिकारियों ने मात्र 20.33 करोड़ की वसूली की। इससे शासन को 1.69 करोड़ राशि कम मिली। अगस्त 2023 में विभाग ने बताया कि छिंदवाड़ा और छतरपुर में वसूली की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। रतलाम में 50.88 लाख रुपये वसूली गई।
इन मदों में नहीं हुई राजस्व वसूली
श्रेणीयां: जिनमें शासन को उठानी पड़ी राजस्व हानि                 प्रकरण     कुल राशि
- अनिवार्य भाटक और रॉयल्टी की कम वसूली अथवा वसूली न होना      625        41.17 करोड़
- जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (डीएमएफ) में कम अंशदान                 422        3.65 करोड़
- गौण खनिज अनुबंध में कम मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन फीस वसूली        81        2.42 करोड़
- विलंबित भुगतान पर ब्याज न लगाया जाना                                247        29.92 करोड़
- निर्धारित सीमा से अधिक खनन पर लागत की वसूली नहीं                152        635.02 करोड़
- खनन योजना के बिना उत्खनन पर वसूली न होना                          10         81.02 करोड़
- अन्य अनियमितताएं                                                         1292      252.09 करोड़
कुल  प्रकरण व राजस्व हानि                                                2829     1045.31 करोड
नोट - लेखापरीक्षा की सूचना के बाद विभाग ने कुल 25.07 करोड़ राजस्व वसूली के 381 प्रकरणों को ही स्वीकारा। साथ ही 225.61 करोड़ के 1949 प्रकरणेां की समीक्षा का आश्वासन दिया। मार्च 2024 तक कुल 51 लाख की वसूली की सूचना भी दी।  

‘कैग की रिपोर्ट विभागीय कार्यालयीन प्रक्रिया के बीच तैयार होती है। कुछ वसूली प्रक्रिया कलेक्टर-तहसीलदार के स्तर से प्रक्रियाधीन होती है। इसलिए राशि और प्रकरणों में अंतर हो सकता है। हालांकि हम कैग रिपोर्ट को देखेंगे। जहां वसूली नहीं हो पा रही है, वहां के लिए आरआरसी जारी कर वसूली कराएंगे।’

फ्रेंक नॉबल ए
संचालक-खनिज, मध्यप्रदेश