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मध्यप्रदेश

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सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण के विरोध में उतरा किसान संघ

मध्यप्रदेश

-मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, प्रयागराज की तर्ज पर करें खेती का जमीन का उपयोग
भोपाल। सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन जिला प्रशासन द्वारा किसानों की भ्ूामि अधिग्रहण के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर भारतीय किसान संघ ने आपत्ति ली है। इस बार खेती की जमीन पर स्थाई निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। जिस पर किसान संघ को आपत्ति है। किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जमीन अधिग्रहण के संबंध में चर्चा करने और प्रयागराज कुंभ की तर्ज पर किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दावा किया है कि सिंहस्थ के लिए किसानों की लगभग सात हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है।
किसान संघ ने कहा है कि उज्जैन सिंहस्थ में स्थायी निर्माण के बजाय नदी के किनारे किनारे मेला बनाने की बात पत्र में कही गई है, जिसके लिये किसान सहमत हैं। पूर्व की भांति 2 से 3 माह के लिये जमीन अधिग्रहण किया जाएगा। उप्र महाकुंभ की भांति अस्थायी निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था भूमिगत करने, 6 माह के लिये अधिग्रहित जमीन का पर्याप्त मुआवजा, रास्ते, बिजली, पानी, सीवेज के लिये किसी भी प्रकार से स्थायी निर्माण न किया जाए। किसान संघ ने सिंहस्थ के लिए किसानों के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया किसान हितैषी न होने पर विरोध में उतरने की चेतावनी दी है। प्रदेश के तीनों प्रांतों में संगठन की बैठकों का क्रम जारी है।
भूमि अधिग्रहण के नाम पर सिर्फ आश्वासन की खेती
भारतीय किसान संघ ने संघ मुख्यालय नागपुर में आयोजित प्रबंध समिति की बैठक में देश में भूमि अधिग्रहण कानून किसान हितैषी बने इसको लेकर प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। जिसमें देश भर के 43 प्रांतों के किसानों से 15 बिंदुओं पर राय ली गई है। किसानों ने एक मत होकर विकास के नाम पर होने वाले भूमि अधिग्रहण को मात्र आश्वासन की खेती कहते हुये विरोध दर्ज कराया है। पारित प्रस्ताव के सुझावों को केंद्र व राज्य सरकारों को भी भेजा गया है।

मप्र सरकार वापस ले विवादित लैंड पुलिंग एक्ट
विगत दिनों पंजाब में सत्तासीन आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों की जमीन अधिग्रहण करने के लिये लैंड पुलिंग एक्ट लेकर आई थी। जिसका पंजाब के सभी किसानों व किसान संगठनों ने जबरदस्त विरोध किया और सरकार की नीति को सिरे से नकार दिया। इसके बाद सरकार ने राज्य सरकार ने लैंड पुलिंग एक्ट पालिसी व इसके तहत किये सभी संशोधनों, फैसलों को वापिस ले लिया है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी लैंड पुलिंग एक्ट को वापिस लेने की मांग तेज हो गई है।