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स्टॉक में हेरफेर कर समिति प्रबंधकों ने किया करोड़ों का घालमेल
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- नियंत्रक महालेखापरीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
- गड़बड़ी छुपाने के लिए उर्वरक की मात्रा घटाती-बढ़ाती रहीं समितियां
भोपाल। राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) गोदाम से किसानों को सस्ती दरों पर बेचने के लिए मिले डीएपी, यूरिया, एसएसपी और जिंक सल्फेट जैसे उर्वरकों के भंडारण और बिक्री में दस्तावेजी कमी या अधिकता दिखाकर प्राथमिक कृषि शाख सहकारी समितियों के प्रबंधक लाखों रुपये का हेरफेर करते रहे हैं। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक की मप्र में उर्वरक के प्रबंधन एवं वितरण पर वर्ष 2017-18 से मार्च 2022 तक की ऑडिट रिपोर्ट में इस तरह की कई गड़बडिय़ां उजागर की हैं।
समिति प्रबंधकों ने इस तरह की हेरफेर
डीएपी में 8.60 लाख का हेरफेर (अवधि 2018 से 2022) - समिति को मार्कफेड गोदाम से 1382.700 मी.टन डीएपी मिला। प्रबंधक ने 1357.700 मी.टन स्टॉक में लिया और 25 मी.टन को स्टॉक से बाहर रखा। दो साल बाद प्रबंधक ने 5.95 मी.टन अंतिम स्टॉक में 25 मी.टन जोड़कर प्रारंभिक स्टॉक को 30.950 मी.टन तक बढ़ा दिया। प्रबंधक ने अंतिम स्टॉक में हेरफेर की और प्रारंभिक स्टॉक में की गई फर्जी प्रविष्टि को समायोजित करने के लिए बिना किसी बिक्री के अंतिम स्टॉक 26 अप्रैल 2021 को 20.700 मी.टन और 4 अक्टूबर 2021 को 4.30 मी.टन कम कर दिया, जिससे कुल 25 मी.टन रह गया। समिति प्रबंधक ने अंतिम स्टॉक में 25 मी.टन की फर्जी बढोत्तरी की। बाद में दो कर्मचारियों के नाम पर 35.850 मी.टन की बिक्री दिखा कर हेरफेर किया। जिसकी कीमत 8.60 लाख रुपये थी। इसके अलावा 52 मी.टन की बिक्री की बिल बुक/रसीद भी नहीं दिखाई।
यूरिया में 5.04 लाख का हेरफेर (अवधि 2018-2022)- समिति को गोदाम से 2231.010 मी.टन यूनिया मिला। प्रबंधक ने 2145.885 मी.टन स्टॉक से बाहर रखा। मार्च 21 में प्रबंधक ने 4.545 मी.टन के अंतिम स्टॉक में 59.94 मी.टन जोड़कर प्रारंभिक स्टॉक को बढ़ा दिया। प्रबंधक ने फर्जी प्रविष्टि को समायोजित करने के लिए अंतिम स्टॉक में हेरफेर की और अंतिम स्टॉक को 36.96 मी.टन कम कर दिया। प्रबंधक ने फिर से 18.630 मी.टन के अंतिम स्टॉक में 59.94 मी.टन जोड़ा और स्टॉक को 78.570 मी.टन तक बढ़ा दिया। बाद में प्रबंधक ने स्टॉक पंजी में अपने नाम पर 77.310 मी.टन की बिक्री और रोकड़ बही में बकाया बिक्री का उल्लेख किया। ऑडिट रिपोर्ट में यह राशि बकाया बिक्री के रूप में दशाई गई और किसानों को बिक्री का विवरण भी नहीं मिला। इस तरह प्रबंधक ने अंतिम स्टॉक में 119.88 मी.टन की फर्जी वृद्धि की और अंतिम स्टॉक में 114.27 मी.टन की कमी की। जिससे अंतिम स्टॉक में 5.610 मी.टन की अतिरिक्त वृद्ध हुई। प्रबंधक ने 85.125 मी.टन के स्टॉक में हेरफेर की, जिसका बिक्रय मूल्य 5.04 लाख रुपये था। साथ ही 141.92मी.टन यूरिया की समर्थन मूल्य पर बिक्री के दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए।
एस.एस.पी में 27 हजार का हेरफेर (अवधि 2018-2022) - समिति को 230 मी.टन एसएसपी मिला और मार्च 2018 तकशेष स्टॉक 44.440 मी.टन था। कुल 274.400 मी.टन स्टॉकमें से 250.850 मी.टन की ब्रिकी दिखाई गई। इस तरह शेष स्टॉक 23.550 मी.टन बचना था, लेकिन स्टॉक में कुल 19.100 मी.टन ही था। इस तरह 4.450 मी.टन कम मिला, जिसकी कीमत 27 हजार रुपये थी। समिति ने वर्ष 2018 से 2020 के दौरान 11.650 मी.टन की समर्थन मूल्य पर बिक्री की बिल/रसीद भी लेखापरीक्षा के दौरान प्रस्तुत नहीं की।
जिंक फॉस्फेट में 54 हजार का हेरफेर - समिति प्रबंधक ने अक्टूबर 2021 को सहायक के नाम से 1.555 मी.टन जिंक की बिक्री बिक्री पंजी और रोकड़ बही में बकाया बिक्री आय के रूप में दर्ज की। समिति द्वारा किसानों को बिक्री का विवरण उल्लेखित नहीं किया। इसलिए 1.555 मी.टन की संदिग्ध बिक्री हुई। जिसका मूल्य 54 हजार रुपये था। इसके अलावा जिंक का शेष स्टॉक 3.300 मी.टन था, जो संदिग्ध था, क्योंकि स्टॉक से बिक्री घटाने पर शेष 3.015 मी.टन होना चाहिए। समिति ने 2019-20 में 0.070 मी.टन की बिक्री के समर्थन मूल्य पर बिक्री की रसीद बुक भी प्रस्तुत नहीं की।
इन समितियों के उर्वरक स्टॉक में मिली हेरफेर
- प्राथमिक साख सहकारी समिति घाटली, होशंगाबाद
- प्राथमिक साख सहकारी समिति सिरवाड़, होशंगाबाद
- प्राथमिक साख सहकारी समिति आंचलखेड़ा, होशंगाबाद
- प्राथमिक साख सहकारी समिति, बांकी, सिवनी
- प्राथमिक साख सहकारी समिति, सुखतवां, होशंगाबाद
- प्राथमिक साख सहकारी समिति, मिसरोद, भोपाल
- प्राथमिक साख सहकारी समिति, ददरौली, उमरिया
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