अपराध

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घान घोटाले की एफआईआर में अधिकारी भी आरोपी

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- ईओडब्ल्यू में चार महीने से जारी है धान घोटाले की जांच
- तीन दर्जन प्राथमिकी में डेढ़ सौ से अधिक हैं आरोपी
भोपाल। मध्यप्रदेश में विगत मार्च-अप्रैल महीने में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में हुए करीब 50 करोड़ से अधिक का घोटाला उजागर हुआ था। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में करीब तीन दर्जन एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें  करीब डेढ़ सैकड़ा से अधिक आरोपी हैं। आरोपियों में धान केन्द्र प्रभारी, सोसायटी पदाधिकारी व कर्मचारी, धान मिलर के अलावा कई शासकीय अधिकारी व कर्मचारी आरोपी बनाए गए हैं। एफआईआर से पहले ही कई तथ्यात्मक प्रमाण उपलब्ध होने के बवजूद ईओडब्ल्यू की जांच अभी भी जारी है, जांच पूरी होने के बाद ही मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि विगत मार्च-अप्रैल महीने में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में जबलपुर, रीवा, सागर सहित अन्य संभागों के अंतर्गत जिलों में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई थी। इस गड़बड़ी में धान खरीदी केन्द्र प्रभारी, विपणन सहकारी समितियों के पदाधिकारी व कम्प्युटर ऑपरेटर, मिलर और वेयर हाऊसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी। अलग-अलग जिलों में मिली गड़बड़ी के हिसाब से ईओडब्ल्यू ने इस मामले में करीब तीन दर्जन से अधिक प्राथमिकी दर्ज की हैं। जिसमें तत्कालिक रूप से डेढ़ सौ से अधिक लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। कुछ आरोपी जांच के दौरान भी बढ़ाए गए हैं। हालांकि ईओडब्ल्यू के अधिकारी प्रकरण इस मामले में हुई प्रगति को लेकर किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से मना कर रहे हैं।
नान और वेयरहाऊसिंग के अधिकारी भी आरोपी!
सूत्रों का कहना है कि घान घोटाले में ईओडब्ल्यू ने नागरिक आपूर्ति निगम और वेयर हाऊसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू अधिकारियों के विरुद्ध चालान पेश करने के लिए शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगेगा। जबकि सोसायटी, खरीदी केन्द्र प्रभारी सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में सीधे ही आरोप पत्र पेश किए जाएंगे।  
25 टीमों ने 14 जिलों में एक साथ की थी जांच
घान घोटाला उजागर होने के बाद मार्च में ईओडब्ल्यू की 25 टीमों ने एक साथ बालाघाट, जबलपुर, कटनी, सिवनी, डिंडोरी, रीवा, सतना, मैहर, सागर, पन्ना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर और श्योपुर जिलों में छापेमारी की एक साथ 150 सहकारी समितियों और 140 गोदामों की जांच की थी, जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं मिली थीं।
इस तरह सांठगांठ से हुआ धान घोटाला
- फर्जी किसानों के नाम पर पंजीयन करके बिना धान खरीदे ही पैसा निकाल लिया गया। गोदामों और मिलरों के पास धान के बीच खाली भूसी रखवा दी गई।
- जबलपुर में सामने आए धान मिलिंग घोटाले में अधिकारियों ने बिना जांच के राइस मिलर्स को ट्रांजिट परमिट जारी किए। मिलर्स ने फर्जीवाड़ा कर धान की अधिक मिलिंग दिखाई और सरकार से पैसा लिया। मामले में मिलर्स और अधिकारियों की सांठगांठ सामने आई है।
- खरीदी केन्द्रों पर अधिक धान का उपार्जन हुआ, लेकिन मिलर्स को प्रदाय किए जाने के बाद वेयर हाऊस में कम धान भण्डारित की गई। यह घोटाला खरीदी केन्द्र प्रभारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर और सहकारी समिति संचालकों ने मिलकर किया।
‘धान खरीदी घोटाले में हुई एफआईआर की जांच अंतिम चरण में है। जल्द ही इस मामले में न्यायालय में आरोप पत्र पेश किए जाएंगे। शासन से अभियोजन स्वीकृति लेकर आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध भी आरोप पत्र पेश किए जाएंगे। ’
उपेन्द्र जैन, महानिदेशक,
आर्थिक अपराध शाखा, मप्र