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625 दिन क्यों कुंभकरणी नींद सोते रहे कांग्रेसी नेता
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नेता प्रतिपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, बोले मंत्री सारंग
भोपाल। बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के कथित आरोपों को कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में भी प्रचारित करना शुरू कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बाद मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मप्र के 2023 के विधानसभा चुनावों में वोट चोरी तथा चुनाव आयोग के सहयोग से भाजपा द्वारा सरकार बनाए जाने के आरोप लगाए।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार के आरोपों के जवाब में मप्र के खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि अगर कांग्रेस पास इस तरह के प्रमाण थे तो चुनाव आयोग में आपत्ति अथवा प्रमाणों और तथ्यों के साथ निर्धारित 45 दिन की अवधि में न्यायालय में याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय में आपत्ति दर्ज करानी थी। कुंभकरण से भी दो कदम आगे बढक़र कांगे्रस नेता आखिर क्यों इतने दिन सोते रहे। बिहार चुनाव में राहुल गांधी द्वारा परोसे जा रहे झूठ को कांग्रेस नेता मप्र में भी प्रचारित कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मप्र की जनता द्वारा भाजपा को दिए गए जनादेश को 20 महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन कांग्रेस को वोट चोरी की याद अब आई है। 329बी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 1981-82 में चुनाव संबंधी आपत्ति पर उच्च न्यायालय में याचिका के माध्यम से 45 दिन में आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। 1973 के न्यायालयीन प्रकरण चरणलाल साहू विरुद्ध नंदकिशोर भट्ट प्रकरण का उल्लेख करते करते हुए श्री सारंग ने कहा कि ऐसे प्रकरण में समय-सीमा का पालन करना जरूरी है। नए मतदाता, स्थानांतरण, मृत्यु जैसे प्रकरणों में निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों को पुनरीक्षित करता है। फार्म 6,7, 8 के माध्यम से लगातार संशोधन होता है। कांग्रेस को कहीं आपत्ति होती है लेकिन बिना तथ्यों और आंकड़ों के सिर्फ मीडिया के माध्यम से आरोप लगाकर कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि कांग्रेस जब-जब सत्ता में रही, संवैधानिक व्यवस्था का दुरुपयोग किया, लेकिन विपक्ष में आते ही बाबा साहब के संविधान की व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। जवाहर लाल नेहरू को सिर्फ सिर्फ एक वोट मिला, शेष सभी वोट सरदार वल्लभ भाई पटेल को मिले, फिर भी प्रधानमंत्री नेहरू को बनाया गया। बाबा साहब अम्बेडकर के मामले में भी कांग्रेस ने ऐसा ही किया।
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