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राष्ट्रीय चेतना जगाने में साहित्य की बड़ी भूमिका: सबनानी

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सिंधी साहित्य अकादमी का ‘राष्ट्रीय चेतना जा सुर में’ आयोजित 

 भोपाल। साहित्य में बहुत शक्ति होती है, कोई मृतप्राय व्यक्ति भी वीर रस से परिपूर्ण कविताएं सुनकर जोश से भर जाता है। जिसके अंतर्मन में भाव हीनता हो, वह भी अच्छी साहित्यिक कृति को पढक़र या उसका श्रवण कर चेतन मन से उठ खड़ा होता है। यह बात विधायक भगवानदास सबनानी ने सिन्धी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम राष्ट्रीय चेतना जा सुर में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। 

सन्त हिरदाराम नगर स्थित नंदवानी सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में सबनानी ने कहा कि स्कूली बच्चों को राष्ट्रीय व सामाजिक सरोकार से जुड़ी मंचीय प्रस्तुति देते हुए देखना एक सुखद अनुभव है। ये बच्चे श्रेष्ठ नागरिक बनकर राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से बढ़ते हुए एक सुंदर समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम का आरंभ भारतमाता, सन्त हिरदाराम जी तथा वरुणावतार श्री झूलेलाल जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विभिन्न विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्तिपूर्ण गीतों पर कुछ बालक बालिकाओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए, तो वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती लघु नाटिका का भी मंचन हुआ। हेमू कालाणी के बलिदान को रेखांकित करते हुए गीत पर जोशपूर्ण प्रस्तुति तो एक विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुति ‘मुंहिंजो भारत देश महान आ...’ ने सभी को अपने देश की संस्कृति पर गर्व का अनुभव कराया। कार्यक्रम में विभिन्नन विद्यालयों के 145 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की,सभी बालक बालिकाओं को प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार प्रदान किए गए।। इस अवसर पर शिक्षाविद विष्णु गेहानी, बसन्त चेलानी,सिन्धी मेला समिति के अध्यक्ष मनीष दरयानी,साहित्यकार के टी दादलानी,बलू चोइथानी, भगवान बाबाणी, नन्द सनमुखानी, नारी लछवानी, दिलीप लालवानी,मोहित शेवानी, नरेश वलेचा,हीरो हिन्दू इसरानी, नानक दादलानी, हरीश विधानी,प्रमुख रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कविता इसरानी ने किया। आभार प्रदर्शन अकादमी  के निदेशक राजेश वाधवानी ने किया।