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विशेष

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शहर की डेयरियों पर पड़ा दूध का टोटा

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एनडीडीबी से सांची के अनुबंध के बाद गांव-गांव से दूध उठा रहीं सहकारी समितियां 
भोपाल। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश में पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का अनुबंध स्थानीय सांची दुग्ध संघ से कराया है। अनुबंध के तहत दुग्ध संघ के लिए सहकारी समितियां गांव-गांव से दूध एकत्रित कर पहुंचा रही हैं। इसका प्रभाव शहर में संचालित उन दूध-दही की डेयरियों पर पड़ा है, जहां दूधिए स्वयं मोटर साइकिल अथवा अन्य वाहन से दूध पहुंचाते थे।
सांची से सस्ता था, अब डेयरियों पर महंगा हुआ दूध
राजधानी में हजारों की संख्या में संचालित दूध डेयरियों दो महीने पहले तक दिनभर अब दूध बिकता था। गांव से पर्याप्त दूध नहीं मिल पाने और दूधियों द्वारा भी दरें बढ़ाने के कारण डेयरी संचालकों ने भी दूध की दरें बढ़ा दी हैं। पहले जब सांची फुल क्रीम दूध 64 रुपये प्रति किलो था, उस समय डेयरियों पर दूध की दर 55-60 रुपये प्रति किलो थी, लेकिन अब सांची की थैली 67 रुपये में आती है, लेकिन डेयरी पर खुला दूध 65-70 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है। डेयरी संचालकों के साथ-साथ परेशानी उन लोगों को अधिक हो रही है, जिन्हें थैली के दूध का स्वाद नहीं भाता है।
20 रुपये बढ़े दही के भाव
दो महीने पहले तक डेयरियों पर दूध सौ रुपये प्रति किलो के भाव मिलता था। दूध की कीमतें बढऩे के बाद से 120 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है।
भोपाल में 25 हजार पशुपालक जोडऩे का लक्ष्य

मध्य प्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध निदेशक डॉ. संजय गोवानी का कहना है कि राज्य सरकार एवं राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के मध्य हुए सहकार्यता अनुबंध के अंतर्गत इस वर्ष संघ के कार्यक्षेत्र में एक हजार नई दुग्ध समितियां गठित की जा रही हैं। भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीतेश जोशी के अनुसार इस कदम से 25000 पशुपालकों को संघ से जोड़ा जा रहा है। भोपाल दुग्ध संघ ने दुग्ध समितियों के माध्यम से दुग्ध खरीदने के लिए दरों को भी बढ़ाया है। एक सितम्बर 2025 से दूध 840 रुपये प्रति किग्रा फैट की दर से दूध खरीदा जा रहा है।
क्या कहते हैं डेयरी संचालक
जब सरकार ही दूध की कीमत बढ़ा रही है, गांव से दूध की आपूर्ति कम हो पा रही है। ऐसी स्थिति में डेयरी संचालकों को भी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। हालांकि मेरे पास खुद की गाय-भैंस हैं, 4 क्विंटल दूध का उत्पादन होता है, इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं हुई।’
प्रशांत राजपूत
संचालक-बृज अमृत दूध डेयरी, मंदाकिनी कॉलोनी


‘सरकार ने दूध की दरें बढ़ा दी हैं। समितियां अधिक कीमत पर गांव में ही दूध खरीद रही हैं। इसलिए कई दूधियों ने गांव से दूध लाना बंद अथवा कम कर दिया है। पहले सुबह-शाम पर्याप्त मात्रा में दूध-दही उपलब्ध होता था, अब जितना आता है, थोड़ी देर में बिक जाता है। कई लोगों को डेयरियों से बिना दूध के ही लौटना पड़ता है।’

सौमिल लालवानी,
संचालक वाहेगुरू, मिल्क डेयरी, कोलार रोड