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दवा कंपनी मालिक को हो सकती है आजीवन कारावास तक सजा

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दवाओं पर मोटा कमीशन और घूसखोर सिस्टम बना मासूमों की मौत का कारण?

भोपाल। छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप से हुई 25 मासूमों की मौत के बाद यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस पूरी घटना में असली दोष किसका है। विभाग के दो वरिष्ठ और दो कनिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। मासूमों की मौत का कारण बनी दवा का विक्रय मप्र में प्रतिबंधित हो चुका है। आरोपी दवा कंपनी का संचालक गिरफ्तार हो चुका है। सरकार अन्य दोषियों पर भी सख्त कार्रवाई की बात कह रही है। 

भारत सरकार के औषधि एवं प्रशासन सामग्री अधिनियम, 1940 के अनुसार औषधीय सामग्री में मिलावट अथवा अमानक होने की स्थिति में दोषी सीधे तौर पर दवा कंपनी का संचालक होता है। उसकी दवा के प्रभाव से होने वाली क्षति अथवा संभावित क्षति के आधार पर अधिनियम की धाराओं के तहत उस पर प्राथमिकी दर्ज होती है, जिसमें अर्थदण्ड और जेल के साथ-साथ आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। छिंदवाड़ा की घटना में दर्ज प्राथमिकी और घटनाक्रम के पंचनामा के आधार पर ही इस घटना के दोषी और उनकी सजा तय हो सकेगी। 

कमीशनखोरी पर चल रहा अरबों का दवा बाजार

मध्यप्रदेश ही नहीं, देशभर में एलोपैथी दवा का अरबों-खबरों का कारोबार मोटे कमीशन से चल रहा है। इस सिस्टम में विभागों के जिम्मेदार अधिकारी, चिकित्सक, मेडिकल स्टोर संचालकों का गठजोड़ होता है। सस्ती जैनरिक दवाओं के स्थान पर चिकित्सक ऐसी ब्रांडेड दवा मरीज के पर्चे में लिखते हैं, जिनमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा कमीशन मिलता है। इसी प्रकार संबंधित चिकित्सक के आसपास उन कंपनियों की दवाओं की उपलब्धता होती है। कमीशन की इस कड़ी का महत्वपूर्ण अंग कंपनी प्रतिनिधि (एमआर)होता है, जो चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक से सौदा और हर महीने बिकी दवा के आधार पर बना कमीशन का लिफाफा पहुंचाने का काम करता है। 

बिना फार्मासिस्ट बिक रही दवा, अधिकारी मौन

राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में शायद ही 5 प्रतिशत मेडिकल स्टोर ऐसी होंगी, जिन्हें फार्मासिस्ट डिग्रीधारी चला रहे होंगे। क्योंकि किसी भी फार्मासिस्ट की डिग्री संलग्र कर मेडिकल स्टोर संचालन किए जा रहे हैं, जिसके बदले में फार्मासिस्ट को 10-20 हजार रुपये महीना दिया जा रहा है। लेकिन सिस्टम से जुड़े ड्रग इंस्पेक्टर अपनी सुविधा के हिसाब से ही इनके निरीक्षण के लिए जाते हैं।  

‘छिंदवाड़ा का प्रकरण बहुत ही गंभीर है। एफआईआर में जिन्हें आरोपी बनाया जाएगा और ड्रग एण्ड कॉस्मेटिक कंट्रोल एक्ट में जिन धाराओं के साथ एफआईआर होगी। दोषी सिद्ध होने पर संबंधित को उसी आधार पर सजा मिल सकेगी। हालांकि अमानक और जहरीली दवाएं बनाने जैसे अपराधों में नुकसान के आधार पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।’

अरुण गोस्वामी, 

वरिष्ठ अधिवक्ता, भोपाल