Breaking News:
अपराध
फर्जी आवास आवंटन मामले में छह साल में नहीं हो सकी वसूली
अपराध
7 सालों तक गृह विभाग में पदस्थ बाबू से सेटिंग कर हुए थे फर्जी आवंटन, 6 साल पहले हुआ था उजागर
भोपाल। राजधानी भोपाल में जून 2019 में उजागर हुए शासकीय आवासों के फर्जी आवंटन के मामले में गृह विभाग के आरोपी बाबू तो जेल भेज दिया गया था। लेकिन फर्जी तरीके से आवास आवंटित कराने वाले शासकीय सेवकों से नियमानुसार लाखों रुपये किराए की राशि की वसूली विगत छह सालों में नहीं हो सकी है। मामला उजागर होने के बाद सभी फर्जी आवंटियों को नियमानुसार किराए की 10 गुना राशि के हिसाब से वसूली का नोटिस दिया गया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रकरण में हाल के कुछ आवंटियों ने राशि जमा कराई थी, जबकि कुछ ने न्यायालय से स्थगन ले लिया था। तब से मामला ठंडे बस्ते में है।
गृह सचिव के फर्जी हस्ताक्षर से बाबू ने बनाए थे आदेश
राजधानी भोपाल में शासकीय आवंटन के आवेदन संपदा संचालनालय में पहुंचते हैं। लेकिन आवास आवंटन बोर्ड की बैठक से तय होते हैं और प्रत्येक आवंटन आदेश गृह सचिव के हस्ताक्षर से जारी होता है। लेकिन जून 2019 में संपदा संचालनालय के तत्कालीन संचालक मुकुल गुप्ता को बिना बोर्ड बैठक के आवास आवंटित होने पर शक हुआ। उन्होंने जांच की तो इस घोटाले की सच्चाई सामने आई। जांच में पता चला कि 2014 से 2018 के बीच गृह विभाग की आवास आवंटन शाखा में पदस्थ रहे संपदा संचालनालय के लिपिक वर्ग-2 राहुल खरते ने आवंटी शासकीय सेवकों से 30 से 80 हजार रुपये तक की रिश्वत लेकर उन्हें गृह सचिव के फर्जी हस्ताक्षर वाले आवास आवंटन आदेश थमा दिए। बाबू खरते ने 2018 में 66 आवास फर्जी तरीके से आवंटित किए थे । 2019 में भी नए 25 आवास आवंटन के आदेश जारी किए थे। इसके पहले भी 25 फर्जी आवंटन सामने आने पर उसके विरुद्ध जहांगीराबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उसकी गिरफ्तारी हुई थी। आरोपी अभी जेल में है।
आवंटियों में मुख्यमंत्री के सुरक्षा दस्ते के पुलिसकर्मी भी
गृह विभाग में पदस्थ बाबू को रिश्वत देकर फर्जी तरीके से आवास आवंटित कराने वालों में पुलिस सूबेदार से लेकर इंटेलीजेंस, सीआईडी, विधानसभा कर्मचारी और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में पूर्व में तैनात रहे पुलिसकर्मी भी शामिल थे। संपदा संचालनालय की ओर से मामले में आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई का आवेदन भेजा गया था साथ ही पत्र के माध्यम से गड़बड़ी का विवरण भी पुलिस को दिया गया था। इस तरह की चर्चा भी है कि चूंकि आवास आवंटित कराने वाले ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं इसलिए न तो फर्जी तरीके से आवंटन कराने पर इनके विरुद्ध कार्रवाई हुई और न ही छह सालों में लाखों रुपये की वसूली हो सकी है।
अन्य खबर
ट्रेंडिंग खबरें
मध्यप्रदेश
रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की...
05-05-26
राजनीति
मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले...
04-05-26
राजधानी
कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार
04-05-26
राजनीति
पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश...
04-05-26
राजधानी
‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में...
04-05-26