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डीएड की फर्जी डिग्री से शिक्षक बने 34 आरोपियों पर जालसाजी की एफआईआर

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- आठ शिक्षकों के खिलाफ भोपाल एसटीएफ को मिले सबूत 

- माध्यमिक शिक्षा मंडल की तरफ से जारी रिपोर्ट को ही बदला

भोपाल। स्पेशल टास्क फोर्स ने प्रदेश के 34 शिक्षकों के खिलाफ जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया है। यह सारे शिक्षक मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कूटरचित डिप्लोमा इन एजुकेशन की डिग्री लगाकर नौकरी कर रहे थे। इस मामले की जांच कर रही पांच सदस्यीय टीम ने आठ शिक्षकों को चिन्हित कर लिया है। अधिकांश शिक्षक मालवांचल और चंबल क्षेत्र के हैं। 

पुलिस अधीक्षक भोपाल एसटीएफ राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार इस संबंध में हमें पुष्ट खबर मिली थी। इसलिए जांच करने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल से संदेहियों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी। पूरी जांच ग्वालियर डीएसपी प्रवीण सिंह बघेल के नेतृत्व में चल रही थी। उन्होंने मंडल से रिपोर्ट भी मांगी थी। जिसे भोपाल से निकलने के बाद सुनियोजित तरीके से बीच रास्ते में बदली गई थी। एसपी ने बताया कि यह सिलसिला 2006 से चल रहा है। अभी तक एसटीएफ को 34 संदेहियों की सूची मिल गई है। इन सभी के दस्तावेजों को सत्यापित कराने का काम एमपी बोर्ड से चल रहा है। बोर्ड ने अभी तक आठ शिक्षकों के संबंध में लिखित में कहा है कि इन्हें किसी तरह की डिग्री जारी ही नहीं हुई थी। इसके बावजूद यह सारे शिक्षक स्कूल में नौकरी कर रहे थे और तनख्वाह भी ले रहे थे। 

इन्हें बनाया गया है आरोपी

एसटीएफ ने जिन आठ शिक्षकों को चिन्हित किया है उनमें गंधर्व सिंह रावत पिता संतोष सिंह रावत, साहब सिंह कुशवाहा पिता खेमराज कुशवाहा, बृजेश रोरिया पिता भान सिंह रोरिया, महेंद्र सिंह रावत पिता लक्ष्मण सिंह रावत, लोके सिंह पिता जगन्नाथ सिंह, रुबी कुशवाहा पिता शिव कुमार कुशवाह, रवीन्द्र सिंह राणा पिता उदयभान सिंह और अर्जुन सिंह चौहान पिता बुलाखी सिंह चौहान हैं। यह सभी शिक्षक ग्वालियर जिले के अलग-अलग विद्यालयों में पदस्थ हैं। इन सभी आरोपियों ने डिग्री किस व्यक्ति से ली थी यह गिरफ्तारी के बाद पता चल सकेगा। 

कई विभाग संदेह के दायरे में आए

एसपी श्री भदौरिया ने बताया कि इस मामले में मंडल के कर्मचारियों को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। इसके अलावा संबंधित जिले के नोडल अधिकारी जिन्होंने डिग्रियों को सत्यापित किया वह भी शक के दायरे में हैं। अभी प्रकरण दर्ज किया गया है। इसलिए सारी विवेचना प्राथमिक स्तर पर हैं। एसटीएफ का मानना है कि फर्जी तरीके से टीचर बनने वाले आरोपियों की संख्या 50 से अधिक हो सकती है। इस मामले में डिग्री बनाने वाले आधा दर्जन संदेहियों के बारे में खबर मिल रही है।