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परिवहन की कमाई के फेर में खतरे में नेताजी की कुर्सी, किस्सा दो जुगाड़ू नेताओं का
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फर्जी भांजे से कमाई के फेर में मामा की कुर्सी पर संकट
Gossip गुगली। वाहन वाले विभाग में कोरी वर्दी से डबल स्टार तक जंप लगाने वाले दतिया वाले स्वामी जी ने कमलदल के पूर्व रीजनल प्रभारी को सगा मामा बताकर कमाई का पॉइंट तो ले लिया लेकिन मोटी कमाई के फेर में स्वामी को सिर्फ पहचान वाला बताने वाले कथित मामा खुद संकट में आ गए है।दो महीना पहले वसूली के फेर में सड़क पायलट को मौत के मुंह तक पहुंचने वाले भांजे का सस्पेंशन टलवाने जैसी और भी खबरें मंत्री ने हाउस से लेकर संघटन के केंद्र तक पहुंचा दी है। शिकायतों का सत्यापन भी हो चुका है। शायद इसीलिए हाल में जारी हुई सूबे की टीम का हिस्सा बनने से भी उन्हें वंचित होना पड़ा है। अब निगम मंडल की आस में निर्वासन काट रहे मामा को फिर से निराशा हाथ लग सकती है। अफसरों और मंत्री जी को गुमराह कर एक खोके से ज्यादा की अवैध वसूली और एक्सीडेंट की आड़ में महीना डकार जाने की स्वामी की शिकायत भी ऊपर तक पहुंच गई है सो संघटन में सलाहकार की भूमिका में रहे कथित मामा को सच का आईना दिखाकर पीतांबरा माई के शहर से स्वामी जी की विदाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। सेना की गणवेश भी स्वामी जी की परेशानी बढ़ा सकती है।
सिंगल फीते भाई को कमाई का पॉइंट दिलाने वाले पूर्व मंत्री की खुद कुर्सी पर खतरा
बात एमपी के शिवपुरी- राजस्थान बाड़र की है। 19 वाली साढ़े 15 महीने वाली नाथ सरकार में मंत्री नहीं बन सके चंबल के सीनियर और अब कमलदल के पराजित विधायक भले अब तक खुद कुर्सी की बाट जोह रहे हो, लेकिन अनुज को कमाई वाली पोस्ट दिलाने में वे कतई नहीं चूके हैं । दलबदल कर सत्तादल पर उपकार का पारिश्रमिक वे ब्याज सहित वसूलना चाहते है।
दिव्यांग पंजे वाली नाथ सरकार में भी वे सत्ता का सहारा बने थे, लेकिन दबंग हौसलों के साथ, परन्तु कमलदल सरकार में आते ही कुँहों के जंगल वाली विधायकी जाने से जंगल के राजा वाली सत्ता की कुर्सी भी गवां बैठे है। अब सत्ता के साथ होते हुए भी खुद को असहाय, सत्ता के अधीन और याचक की भूमिका में देख रहे है।
खैर फिर से बाड़र की तरफ मुड़ते है। नाथ सरकार में दोनों अनुजों को बाड़र की कमाई दिलाई थी। अब सेवा में इकलौते बचे अनुज को बॉडर पहुंचा दिया है। परेशान तो अपना दो सितारों वाला भाई हो गया था, जो बिना फीती वाले जूनियर के आदेश पर सेवा पुस्तिका गिरवी नहीं रख सका। सो अपने बॉस से घर बुलाने या दूसरा बॉडर बदलने की मांग पर अड़ गया। Boss ने बात मान भी ली और महाकाल की नगरी से सटे राजस्थान के दूसरे बॉडर पर भेज दिया। हालांकि Ex हो चुके विधायक जी भलें फूले नहीं समा रहे हो, लेकिन शायद उन्हें कमलदल का टेस्ट पूरी तरह पता नहीं है। बॉडर के फेर में उनके खुद की कुर्सी के प्रयासों पर भी पानी फिर सकता है।
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