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Gossip गुगली

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हिडन पिक्चर: पर्दे के पीछे का सच, बाहरवाली के फेर में बुढावा खराब कर रहे माननीय

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बाहरवाली के फेर में बेटे से पिटे माननीय

 चम्बल के किनारे वाली विधानसभा वाले माननीय घरवाली और बाहरवाली के फेर में चकरघिन्नी बन अपना बुढापा खराब करने की कगार पे हैं। चम्बल वाले घर में घरवाली और रजधानी की नई नवेली कोठी में बाहरवाली का यह चक्कर भी पहुत पुराना है। घर और बाहर सबको अता-पता भी है। लेकिन परेशानी तो उनका अपना वो लाडला है, जिसे गुंडई के गुर माननीय से अनुवांशिक मिले हैं। हलधर के हक पर ढांका डालकर माननीय रसद और राशन तो दोनों ही ठिकानों पर पहुंचा रहे हैं। लेकिन इकलौता बेटा नहीं चाहता कि  पिता द्वारा अड़ीबाजी और हेरफेर वाली मेहनत से कमाई गई आकूत संपदा दो हिस्सों में बंटे। सूत्रों का कहना है कि बाहरवाली के चक्कर में राजधानी की नई कोठी पर बंद कमरे में माननीय के अंग कई बार बेटे की हथेलियों का आकार नाप चुके हैं। बाहरवाली भी कई बार अपने तरीके से माननीय को गरिया चुकी है। माननीय के लिए झंडे उठाने और चंबल से रेत की ट्रालियां ढोने वाले खुसुर फुसुर जरूर कर रहे है कि बाहर वाले किसी की हिम्मत नहीं कि माननीय की तरफ आंख उठाकर भी देख सके, वे तो घर में ही फ़जियत करा अपना बुढ़ापा खराब कर रहे हैं। 


सरकार के भवन में फिर से हन्नी परियों का विचरण

नाथ सरकार में प्रदेश की आर्थिक राजधानी से हरिभजन करते हुए उजागर हुए हन्नी परियों के काले कारनामे की स्मृतियां और चर्चे जो ठंडे पड़ चुके हैं। सो एक बार फिर से सूबे के सबसे बड़े सरकारी भवन में हन्नी परियां एक बार फिर से चेहरे बदलकर शिकार की तलाश में विचरण करने लगी हैं। पुराने संकट से सबक नहीं लेकर साहब लोगों ने इनके स्वच्छंद विचरण के लिए चेंबर के द्वार भी खोल रखे हैं। नए क्लेवर में ये हन्नी परियां कुछ समाजसेवा के बहाने तो कुछ कलम-कैमरा थामकर भवन के गलियारों में पहुंच रही हैं। साहब लोगों को सलाह है कि पिछले कांड में तो चौथी मंजिल वाले साहब खुद ही रंगीले मिजाज वाले निकले थे सो जीतू को निपटाकर माननीय और सम्माननीय सभी को बचा लिया, लेकिन अब वाले साहब से ऐसी उम्मीद करना बेमानी है।