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Hidden picture's Gossip गुगली: ये डॉ मोहन हैं, गंगा मैया को भी उज्जैन से बहाकर मानेंगे ,पंजादल के चना-मुरमुरा गायब, कमल दल में झड़ रहे बादाम
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ये डॉ मोहन हैं, गंगा मैया को भी उज्जैन से बहाकर मानेंगे
जब से एमपी की सत्ता की कमान डॉक्टर ने संभाली है। महाकाल की नगरी विश्व पटल पर चमकने लगी है। डॉ मोहन भैया का कोई भी भाषण, बैठक या चर्चा हो उज्जैयनी के ओजस्वी, यशस्वी इतिहास और महाराजा विक्रमादित्य के शौर्य और पराक्रम के उल्लेख के बिना पूरा हो ही नहीं सकता। तीन साल बाद आ रहे सिंहस्थ की भव्यता और दिव्यता के लिए कराए जा रहे कामों की फेहरिस्त भी सूबे में चर्चा का केंद्र होती ही है। सरकार की सूची में दर्जनभर काम पूरे सूबे के लिए होंगे तो आधे तो अपने आप महाकाल की नगरी निकल जाते हैं। हालांकि डॉक्टर साहब पहले सूबा सदर नहीं हैं, इससे पहले के सूबेदारों ने भी यही किया। कभी मालबा, तो कभी बघेलखंड, बुंदेलखंड तो कभी मध्यक्षेत्र और विभाजन से पहले छत्तीसगढ़ से भी विकास और परियोजनाओं की इसी तरह की एक तरफा बयार चलती रही है। जिस क्षेत्र को सत्ता मिली उसने अपने क्षेत्र में चमन बरसाया। हालांकि एक दशक सत्ता पर काबिज रहे दिग्गी की सोच अपने गढ़ से बाहर नहीं निकल पाई थी। मोहन भैया तो फिर भी मालवा को साथ लेकर चल रहे है। अभी रानी अहिल्या की नगरी से निकली कल-कारखानों की गंदगी से दूषित हुए मैया क्षिप्रा के आंचल की सफाई अंतिम चरण में हैं। मोहन भैया ने गंदगी फैलाने वाले (जमीनी और राजनीतिक दोनों प्रकार के) नल्लों का मुह मोड़ दिया है, भलें रुपये आठ सौ करोड़ लगे या आठ हजार करोड़ लग जाएं। अब तो चर्चा है कि डॉ मोहन भैया तो एक दिन गंगा मैया को भी महाकाल के दर्शन करा कर ही मानेंगे। भैया को पॉलिटिक्स का ककहरा पढ़ाने वाली अपनी कलावती दीदी भी कहती है, मोहन जिद्दी बहुत है, जो ठान ले करके ही मानता है।
पंजादल का डब्बा खाली, कमल दल में टपक रहे बादाम
एमपी की राजनीति को न हाथी की सवारी भाई, न ही साइकिल के पैडल ही कभी स्पीड बना सके। पंजा और फूल के बीच झूलती रही सत्ता कभी इधर हरियाती, तो कभी उधर मुरझाती रही है। सूबे में 15 महीना चली नाथ सरकार का सुख पंजाधारी ले पाते उससे पहले ही नाथ ही अनाथ हो गए, सत्ता नाथ के हाथ से फिसलकर कमल से कमलदल की झोली में चली गई। 20 साल से ज्यादा टाइम तक सत्ता सुख भोगने वाले कमलदल के छुटभैये भी आनंद की वंशी बजा रहे हैं, वहीं पंजा दल में ‘बिल्ली के भाग से छींका फिट टूटेगा’ का भरोसे कम चल रिया है। अब मुद्दे पर आएं तो नाथ सरकार में पंजादल के जो कुर्ताधारी चना-मुरमुरा तक पहुंच गए थे, अब सारे डिब्बे खाली हो चुके हैं। पंजा दल में अब मेहमानों और कार-करताओं को साफ पानी भी नसीब नहीं हो पा रिया है। वहीं कमलदल के मुख्यालय में अंदर विराजने वालों को काजू-अखरोट भी खट्टे लगने लगे हैं, तो कमरों के बाहर हरियाती पारक में लगे 9 वृक्षों से कच्चा बादाम टपक रिया है, जिन्हें बीनने की फुरसत कऊ के पास नई है।
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