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फर्जीवाड़ा कर फर्म हथियाने वालों पर ईओडब्ल्यू ने की एफआईआर, पुरानी तारीख में फर्म गठन दिखाकर मृत सहभागी के उत्तराधिकारियों को किया बाहर
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भोपाल। पुरानी तारीख में फर्म का कूटरचित गठन दर्शाकर एवं पार्टनरशिप डीड तैयार कर फर्म के दिवंगत सहभागी (पार्टनर) के उत्तराधिकारियों को धोखा देकर फर्म से बाहर करने वाले आरोपियों के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों ने इस फर्जीवाड़े के लिए एक अन्य सम्पत्ति के पंजीयन में पूर्व में उपयोग किये गए स्टम्प पेपरों का फिर से उपयोग किया।
इस मामले की शिकायत विगत 26 जून 2025 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में भोपाल निवासी श्रीमती प्रमिला अग्रवाल ने की। शिकायत की जांच में पाया गया कि विनोद अग्रवाल एवं उनकी पत्नी अनीता अग्रवाल ने ‘ईरा इंफ्रास्ट्रक्चर’ के नाम से कूटरचित स्टाम्पों का उपयोग कर, वर्ष 2012 में फर्म का गठन होना दर्शाते हुए एक फर्जी पार्टनरशिप डीड तैयार की। इन पुरानी तिथि के दस्तावेजों के आधार पर संबंधित भूमि पर संयुक्त उद्यम एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करते रहे। इस गड़बड़ी के चलते शिकायतकर्ता तथा स्व. विजय अग्रवाल के वैध उत्तराधिकारियों के साथ धोखाधड़ी हुई। इन तथ्यों के प्रकाश में ईओडब्ल्यू द्वारा आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी व कूटरचना से संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
भूमि पंजीयन के स्टाम्प से तैयार किया फर्म का ड्राफ्ट
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि भोपाल की तहसील हुजून के ग्राम सनखेड़ी में स्थित लगभग 1.4 एकड़ भूमि वर्ष 2012 में दो विक्रय पत्रों के माध्यम से खरीदी गई थी। इसमें से एक भूमि के भुगतान का रिकॉर्ड स्व. विजय अग्रवाल के बैंक खाते किया गया था। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि वर्ष 15 जून 2012 को ईरा इंफ्रास्ट्रक्चर नाम से पार्टनरशिप फर्म का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया था, जिसमें विनोद अग्रवाल की 60 प्रतिशत और विजय अग्रवाल की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्शाई गई थी, लेकिन इस डीड पर कभी विधिवत हस्ताक्षर नहीं हुए। इसके बाद वर्ष 2017 में विजय अग्रवाल के निधन के बाद आरोपियों द्वारा 11 अप्रैल 2012 की तिथि दर्शाते हुए एक नई पार्टनरशिप डीड तैयार की गई, जिसमें मृत विजय अग्रवाल के स्थान पर विनोद अग्रवाल की पत्नी अनीता अग्रवाल को पार्टनर बताया। इस डीड का नोटरीकरण वर्ष 2023 में कराया गया और 25 अक्टूबर 2023 को इसका पंजीयन कराया गया। इस तरह दस्तावेजों को जानबूझकर पुरानी तिथि में दिखाया गया ताकि 40 प्रतिशत के पार्टनर मृत विजय अग्रवाल के उत्तराधिकारियों को फर्म से बाहर किया जा सके। पार्टनर डीड के लिए उपयोग किए गए स्टाम्प देवीराम पिता श्री फूलचंद के नाम से क्रय किए गए थे तथा उनका उल्लेख स्टाम्प विक्रेता रजिस्टर में भी इसी उद्देश्य से दर्ज पाया गया।
इनके विरुद्ध हुई एफआईआर
शिकायत की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने विनोद अग्रवाल, श्रीमती अनीता अग्रवाल तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 120-बी –(आपराधिक षड्यंत्र) , धारा 420-(धोखाधड़ी), धारा 467- (बहुमूल्य दस्तावेज की कूटरचना),धारा 468-(धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना),धारा 471-(कूटरचित दस्तावेज का उपयोग) के अंतर्गत अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
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