Breaking News:

• रेखा यादव ने संभाला महिला आयोग अध्यक्ष का कार्यभार • ‘एक्टिव मोड’ में कार्य करें अधिकारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई, समय सीमा बैठक में कलेक्टर के निर्देश • पश्चिम बंगाल विजय पर भाजपा कार्यालय में मना उत्सव, ढोल-नगाड़ों के बीच झूमे कार्यकर्ता, प्रदेश अध्यक्ष ने मिठाई के साथ खिलाई झालमुड़ी • कौशल शर्मा ने ग्रहण किया महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष का पदभार • मोदी की झोली में बंगाल की ममता, भगवा हो गया ‘झालमुई’ का रंग, प्रधानमंत्री बोले यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व दिन • रोटेशन नहीं ट्रांसफर हैं ये: चेकपोस्ट व्यवस्था के बाद ही जारी होगी परिवहन विभाग की चक्रानुक्रम (रोटेशन) सूची! अभी मैदानी अमले को मिलना शुरू हुई नई पदस्थापना
अपराध

Image Alt Text

पार्क की भूमि को प्लॉट बताकर बेचा, ईओडब्ल्यू में हुई एफआईआर, आरोपियों ने तैयार किया फर्जी नक्शा, पार्क, ओपन स्पेश, मंदिर और ट्रांसफार्मर की भूमि पर दिखाए 14 प्लॉट

अपराध

भोपाल। राजधानी भोपाल में सहकारी संस्था की भूमि के नगर एवं ग्राम निवेश से स्वीकृत नक्से में कूटरचना कर सार्वजनिक पार्क, मंदिर, खुली भूमि एवं ट्रांसफार्मर के लिए आरक्षित भूमि को नक्शे में प्लॉट दर्शाकर फर्जी तरीके से बेचने वाले एक बिल्डर-कॉलोनाईजर एवं उसके साथियों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने कूटरचना, धोखाधड़ी, अपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। 

इस मामले की शिकायत भोपाल निवासी दीपक शुक्ला ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से 10 दिसंबर 2025 को की थी। शिकायत में रॉयल हेरिटेज बिल्डर कॉलोनाइजऱ से जुड़े जीशान अली पर विभिन्न सहकारी संस्थाओं की भूमि में गड़बड़ी करने और संस्थाओं की भूमि को चालाकी और षड्यंत्र से स्वयं तथा अपने परिवार के नाम करवाने के आरोप थे। शिकायत में विशेष रूप से नरेला शंकरी क्षेत्र स्थित सहकारी संस्था की भूमि पर स्वीकृत ले-आउट के विपरीत कार्य किए जाने का उल्लेख किया गया। जांच के आधार पर ईओडब्ल्यू ने जीशान अली, एम.ए. बख्श, स्व. मवासी राम सिंह एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध  धारा 120-बी, 420, 467, 468 एवं 471 भारतीय दंड विधान के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। 

17.18 एकड़ आरक्षित भूमि पर बेचे प्लॉट 

 जांच में पता चला कि नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा स्वीकृत मूल ले-आउट के अनुसार इस भूमि का एक हिस्सा आवासीय प्लॉटों के लिए था, जबकि शेष भूमि ओपन स्पेस, पार्क, मंदिर और विद्युत ट्रांसफार्मर के लिए आरक्षित थी। आरोपियों ने मिलकर इस सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अवैध रूप से बेचने की योजना बनाई। नरेला शंकर गृह निर्माण सहकारी समिति, भोपाल की 17.28 एकड़ भूमि में से पार्क और ओपन स्पेस के लिए आरक्षित जमीन को फर्जी नक्शे बनाकर प्लॉट दिखाया गया। आरोपियों ने इस भूमि को आम लोगों को बेच दिया। 

प्लॉट जो था ही नहीं, 24 साल पहले बेचा

कॉलोनी में प्लॉट क्रमांक 262 को अविश्वास मिश्रा को 17 सितम्बर 2002 को बेचा गया। जबकि मौके पर ऐसा कोई प्लॉट था ही नहीं। प्लॉट की बिक्री से मिली राशि एम.ए. बख्श के माध्यम से जीशान अली तक पहुंची। इन तथ्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने षड्यंत्र, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े अपराध में मामला दर्ज किया है।

30 साल बाद ऑडिट में बदला हुआ नाम 

 जांच में पता चला कि नरेला शंकर गृह निर्माण सहकारी समिति का पंजीयन 1976 में हुआ था। शुरू में इसके संस्थापक अध्यक्ष दिनेश शर्मा थे, लेकिन 2005-06 के ऑडिट रिकॉर्ड में एम.एस. बख्श को अध्यक्ष दर्शाया गया है। इससे स्पष्ट हुआ कि उस समय संस्था का वास्तविक संचालन एम.एस. बख्श के हाथ में था, और जीशान अली से उसका पारिवारिक  जुड़ाव था। नरेला शंकर गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा  खसरा क्रमांक 243, रकबा 17.28 एकड़ की भूमि 28 फरवरी 1998 को निकहत शमीम (जीशान अली की मां) के नाम से  सहकारी समिति की सदस्य के रूप में खरीदी गई थी। 2 नवम्बर 1976 को टीएनसीपी से भूमि का जो मूल ले-आउट नक्शा स्वीकृत हुआ था, उस नक्शे में कुछ भूमि को ओपन स्पेस के रूप में दर्शाया गया था। 17 सितम्बर 2002 को जीशान अली, एम.एस. बख्श और मवासी राम सिंह ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत एक कूटरचित और अस्वीकृत नक्शा तैयार कराया एवं एक फर्जी नक्शा लगाकर प्लॉट 262 दिखाया गया और अविनाश मिश्रा को बेच दिया गया। 

फर्जी नक्शे से तैयार किए 14 प्लॉट बेचे 

फर्जी नक्शे में  ओपन स्पेस की भूमि पर हाथ से प्लॉट क्रमांक 254 से 267 तक कुल 14 प्लॉट बनाए गए। मौके पर वहां पार्क, मंदिर और बिजली का ट्रांसफार्मर मौजूद था। जो प्लॉट बेचा गया, वह जमीन पर था ही नहीं। क्रेता अविनाश मिश्रा ने बताया कि उन्होंने एक लाख 5 हजार रुपये देकर प्लॉट क्र. 262 खरीदा, लेकिन मौके पर पया कि रजिस्ट्री में दर्शाया गया प्लॉट वास्तविकता में मौजूद ही नहीं था। वहां पार्क, मंदिर एवं विद्युत ट्रांसफार्मर स्थित थे।