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दारूवाज को महंगा पड़ा एमपी के डॉक्टर से पंगा
राजधानी से आधे एमपी में खुद की बनी घटिया दारू सप्लाई करने वाला दारूवाज इस बार एमपी के डॉक्टर के अंटे में फंस गया है। शीर्ष कोर्ट में वकीलों की फौज के सहारे मामा को 18 साल छकाता रहा ये दरूवाज़ पहली बार टेंशन में दिख रहा है। महीना भर से दारू की फैक्टरी पर ताला है और दुकानों पर भी दुश्मनों की दारू धड़ल्ले के खप रही है। महीनभर में ही 200 खोके से जादा का नुकसान उठा चुका है। इस बार अंटी ऐसी उलझी है कि दिल्ली कोर्ट से भी राहत की उम्मीद कम ही है, बल्कि कंपनी के करता - धरताओ को हथकड़ी के योग भी बन रहे है। मामला कुछ साल पुराना है जब दारूवाज ने नकली दारू और छोटे अफसरों को खरीद कर दारू की कालाबाजारी शुरू कर दी थी। इस मामले में अफसर जेल में तो अफसर के ईमान का सौदा करने वाला दारूवाज बाहर?अभी पूरे सूबे में दारू सप्लाई के ठेके का सीजन चल रहा है। डॉक्टर नहीं चाहता था के इस दारूवाज को व्यवस्था में शामिल किया जाए। दरूवाज भी पूरा जोर लगाए है। सो दिल्ली कोर्ट से एक बार टेंडर तारीख भी आगे खिसकवा ली। अब देखना है कोर्ट दारूवाज को राहत देता है या झटका। वैसे बता दें कि मोनोपली के लिए फेमस दरूवाज से पूरे सूबे के ठेकेदार परेशान है। वैसे बता दें कि डॉक्टर के दा 'नारान दा' भी दारू कारोबार के पुराने खिलाड़ी है। सूत्रों का कहना है कि वही इस मामले को हैंडल कर रहे हैं और दारूवाज 'दा ' की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है।
नेताजी के सपने में बार बार झांक रही मंत्री की कुर्सी
फॉरेस्ट मंत्री की कुर्सी की चाहत लेकर कमलदल से नए-नए जुड़े नेताजी को उनकी किस्मत और कर्मों ने कहीं का नहीं छोड़ा। वोटो की लूट और फर्जीवाड़ा करके भी चुनाव तो नहीं जीत पाए, लेकिन कोर्ट के सहारे फिर से विधायक और मंत्री बनने का सपना संजो बैठे। हाल में नेताजी को मझौले कोर्ट ने कुछ उम्मीद जगा भी दी, लेकिन ऊपरवाले कोर्ट ने फिर से बड़ा झटका दे दिया। वैसे नेताजी के करीबी बताते है कि मझौले कोर्ट के फैसले के बाद तो नेताजी रातभर सो नहीं पाए। झपकी लगते ही कुर्सी का सपना आने लगता। आधी रात में भी नेताजी बिस्तर छोड़ फोम वाली ऊंची कुर्सी पर बैठने का अभ्यास करते देखे गए। अगले दिन दिल्ली कोर्ट से आई खबर ने नेताजी का दिल और सपना दोनों को चकनाचूर कर दिया। कानून के जानकार बताते है कि दिल्ली कोर्ट मल्होत्रा का इलेक्शन तो कैंसिल कर सकता है, लेकिन नेताजी के विधायक बनने का सपना नहीं । नेताजी भी अच्छे से जानते हैं कि इस बार इलेक्शन में उतरे तो जमानत भी नहीं बच पाएगी। हमने तो पहले ही नेताजी को चेताया था कि ये कमलदल है यहां सिर्फ सपने ही ऊंचे देख सकते हो। यहां पर्दे के आगे की फिलम पीछे उल्टी चल रही होती है। सो मंत्री की कुर्सी का सपना तो भूल ही जाओ। वैसे नेताजी के लोकल दुश्मन भी बहुत एक्टिव हो गए हैं। फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले नेताजी के साले का sc का जाति प्रमाणपत्र और भाई की फर्जी मार्कशीट भी खंगाली जा रही है। नेताजी के करीबी रिश्तेदारों की इनकम के श्रोत भी लोग खोज रहे है, जो तीन साल में तेजी से बढ़ी है। अब नेताजी पर "घर का न घाट का" वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है।
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