Gossip गुगली

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Hidden Picture's gossip गुगली अब ‘मम्मा’ बनेगा जैन! श्वेतांबर या पीताम्बर?...... महौल खुशी का हो या गम का ठहाके तो लगेंगे, चर्चे गुड्डू के ठहाकों की......

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गुगली अब ‘मम्मा’ बनेगा जैन! श्वेतांबर या पीताम्बर?



जब से एमपी की कुर्सी छिनी है, एमपी वाले ‘मम्मा’ के चेहरे पर तनाव स्पष्ट नजर आ रहा है। लोग कह रहे हैं, ‘मम्मा’ पहले जैसा तो नहीं रहा। हाल में ‘मम्मा’ का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जैन समाज के कार्यक्रम में जैन शब्द की व्याख्या करते हुए ‘मम्मा’का प्रवचन अद्भुत! ‘मम्मा’ कह रहे हैं कि उनकी बहू भी जैन है और अब वह भी जैन बनने की कोशिश कर रहे हैं। सभी में ‘मम्मा’ के लिए गडग़ड़ाहट सुनाई देती है। लेकिन ‘मम्मा’ को समझने वाले कह रहे हैं कि ये ‘मम्मा’ है, माहौल में ढलना और दिल जीतना अच्छे से जानता है। समझना तो भगवान जिनेन्द्र के उपासकों को पड़ेगा। चुनाव के पहले भी ‘मम्मा’ कई समाजों के सम्मेलन कर चुका है। जनजातियों के प्रोग्राम में ठेठ आदीवासी वेशभूषा और डांस, कोटवारों के साथ कोटवार, किरार, राजपूत, मीना, जाट, कीर, केश शिल्पी जैसे कई सम्मेलन मामा ने ज्वाइन किए हैं। ‘मम्मा’ जहां भी जाता है, वैसा ही नजर आने लगता है। शायद ही कोई सम्मेलन बचा हो, जहां ‘मामा’ उस समाज के रंग में न ढला नजर न आया हो। अब लोग कह रहे हैं कि कुर्सी तो खिसक गई ‘मम्मा’ अब क्या-क्या बनना बाकी है। क्योंकि अब इस तरह के अभिनय का सीधा फायदा भी नजर नहीं आ रहा है। 


 महौल खुशी  का हो या गम का ठहाके तो लगेंगे, चर्चे  गुड्डू के ठहाकों की......

पूर्व कांग्रेसी मंत्री के करीबी, राजधानी के अधिकारियों वाले वार्ड से लम्बे समय से चुने जा रहे गुड्डू के ठहाकों की परिषद से प्रशासन तक चर्चा है। इसलिए बिलकुल भी नहीं कि माहौल खुशनुमा हो जाता हैं, बल्कि इसलिए कि गुड्डू भैया का ठहाका कभी-कभी ऐसे स्थान पर भी फूट पड़ता है, जहां का माहौल गमगीन होता है। शोक के माहौल में गुड्डू भैया का ठहाका असहज स्थिति पैदा कर देता है। गुड्डू भैया का यह ठहाका भी निन्जा टैक्निक जैसा है। भैया पर नजर मिले बिना हर कोई उनकी उपस्थिति को मेहसूस कर लेता है। वैसे बता दें कि यह ठहाके पैदायशी नहीं, बल्कि प्रक्टिस का परिणाम है। भैया लम्बे समय से एकांत में नहीं, बल्कि एकांत पार्क की उस टीम में उपस्थित होते हैं, जो ठहाकों की प्रक्टिस कराती है। इसीलिए तो ‘मोटर साइकिल फिसल गई’.... तो हा..हा...हा.., मुझे चोट लगी है...हा...हा...हा..., फलां का निधन हो गया तब भी भैया की प्रतिक्रिया ...अरे कैसे ...हा..हा..हा.. ही सुनाई देती है। लोग कहने लगे हैं, कि गम हो या खुशी, भैया चूकते कहीं नहीं हैं, इसलिए ठहाके हों तो गुड्डू भैया जैसे ....